बहुत अच्छे हाथ है तुम्हारे…..इससे जाहिर होता है कि तुम एक उच्च दर्जे की लड़की हो..(वो अभी भी मेरे हाथ अपने हाथों मे लिए हुई थी)
मैं उन्हे धन्यवाद करते हुए बोली…थॅंक यू, मॅ’म.
वो मुझे घूरती हुई बोली….मुझे मेडम मत बुलाओ..मैं मस्तानी चाची हू..यहाँ की मॅनेजर.(एक बार फिर वो ऐसे ही बोली अकड़ के और मेरा हाथ छोड़ दी.)..मेरी मा साउत इंडियन थी…और मैं अपनी जवानी मे डॅन्स बार मे नाचती थी(वो किन्ही सपनो मे खोते हुए बोली)…
मैं भी उनकी और एक टक ही देख रही थी…जैसी ही उनकी नज़र मुझ पर पड़ी..वो थोड़ा हड़बड़ाते हुए बोली…चलो मैं तुम्हे तुम्हारा कमरा दिखा देती हूँ.
वो मुझे लेकर सीढ़ियों से होते हुए उपर की तरफ ले गयी…रास्ते मे वो बोली..तुम्हे यहाँ काम करने के लिए किसी भी प्रकार का कांट्रॅक्ट साइन करने की ज़रूरत नही है.
नखरे नही करोगी…तो तुम्हे लोगो मे घुलने-मिलने मे आसानी होगी…वो मुझे और उपर जाती हुई सीढ़ियों पर ले जाती हुई बोली…ये घर हमेशा खुला रहता है…पर तुम्हे हफ्ते मे एक दिन की छुट्टी मिलेगी.
ठीक है, मस्तानी चाची-मैं बोली.
कस्टमर को कभी भी ना नही करना…जब तक वो तुम्हारा परिचित ना हो.-वो बोली.
जैसा आप कहे, मस्तानी चाची-मैं बोली.
मेरी नही अपनी इच्छा से काम करो…ये यहाँ के नियम है…वो बोली.
मैं समझ गयी…मस्तानी चाची..मैं बोली.
उन्होने एक दरवाज़े की तरफ इशारा करते हुए बोला…ये है रहस्यमयी खोली..उनके लिए जो चाहते है की उनको कोई देख ना पाए.
उस दरवाज़े पे एक नग्न औरत की तस्वीर बनी हुई थी. उन्होने दरवाज़ा खोला और मैं उसे देखने अंदर घुस गयी..
वो बोली:- कभी कभी कस्टमर्स रूम के अंदर ही भुगतान(पे) कर देते है. तब तुम नीचे काउंटर पे जाकर रिजिस्टर करके पैसा जमा करना और अपना टोकन ले लेना. 15 दिनो बाद तुम अपनी नगद राशि प्राप्त कर सकती हो.(वो मुझे समझाते हुए बोली.) ये घर तुम्हारी कमाई से 50% ले लेगा. बिजली, पानी, मेडिकल, नौकर, बाकी के टॅक्सस जैसे रूम और बोर्ड के और एक्सट्रा चार्जस कुछ भी नही है.(वो मेरी ओर देखकर हस्ते हुए बोली.)
फिर वो मुझे दूसरे कमरे मे ले जाते हुए बोली-सारी प्राइस लिस्ट रिजिस्टर मे लिखी हुई है, किसी होटेल के मेनू की तरह. स्पेशल अनुरोध(रिक्वेस्ट) के लिए एक्सट्रा चार्जस लगते है. उन्होने एक दरवाज़ा खोलकर मुझ से कहा- ये तुम्हारा रूम है..पसंद आया ?
मेरे मूह से तुरंत ही निकला बढ़िया है !!
अंदर घुसी तो देखा चारो तरफ गुलाबी रंग की छटा बिखरी हुई थी..रूम किसी आलीशान शाही कमरे की तरह सज़ा हुआ था..
मैं बोली:- कितना खूबसूरत है..!!
वो बोली:- ये कमरा हमारे यहाँ के बेहतरीन कमरो मे से एक है.
मैं बोली:- थॅंक यू, मस्तानी चाची…आप मेरी तरफ से हमेशा ही खुश रहेंगी.
वहाँ एक बड़ा सा बेड था, जिस पर मक्मल की चढ़र बिछी हुई थी. उन्होने उसकी तरफ इशारा करते हुए कहा…उस तरफ घंटी रखी हुई है.
एक बार बजाना सामान्य के लिए. दो बार दुबारा के लिए, तीन बार आधे घंटे के लिए जो ज़्यादातर 15 मिनिट्स से ज़्यादा का नही होता.(वो चेहरे पर हसी के भाव उत्पन्न करते हुए बोली)
वो अपना चस्मा उतारते हुए बोली-समय बचाने के लिए तुम अपने मूह का भी प्रयोग कर सकती हो पर एक बार अच्छे से जाँच करने के बाद.
जाँच के बाद मतलब ?- मैं बोली.
स्वचहता…बोलते हुए उन्होने मेरा हाथ पकड़ा और मुझे बेसिन के पास ले आई जो वही रूम के कोने मे लगा हुआ था…वो बोली- पहले तुम उसे यहाँ ले के आओ, उसके लंड को हाथ मे पाकड़ो, उसको धो और उसको भीचकर उसको खोलो..(उन्होने मुझे सारी बातें हाथों के इशारे से समझाई)…अगर तुम्हे कही भी दाग-धब्बा, कटा-जला का निशान दिखे तो तुम तुरंत बाहर आ जाओ या फिर एक लंबी रिंग दे देना हम उसे उसी समय यहाँ से भगा देंगे.
मैं बोली- ओह्ह्ह…बीमारी से बचने के लिए……
वो मुस्कुराते हुए बोली- बिल्कुल ठीक..तुम अपने मेडिकल रेकॉर्ड्स लाई हो ?
जी हां लाई हूँ- मैं बोली.(राज ने सारे इंतज़ाम मुझे करके दिए थे.)
मैने अपना हॅंड बॅग खोलकर उस मे से अपना मेडिकल सर्टिफिकेट निकालकर उन्हे दिखाया…
फिर उन्होने उस मे से 2-3 नाम पढ़े, जो मेरी समझ मे तो नही आए और कहा- बहुत अच्छे, जाकर हमारे यहाँ के डॉक्टर को ये मेडिकल सर्टिफिकेट दिखा आओ. वो यहाँ कभी भी आ सकते है साप्ताहिक जाँच के लिए.
मैने अपना सिर हिलाते हुए उन्हे हां कह दिया और उन्होने मुझे मेरा मेडिकल सर्टिफिकेट लौटा दिया.
तुमने कुछ खाया ? – उन्होने पूछा तो मैने फिर सिर हिलाते हुए ना कह दिया.
चलो मेरे साथ दूसरो से भी मिल लो….वो बोली.
वो मुझे एक बड़े से डाइनिंग हॉल मे ले गयी….जहाँ एक बढ़ा सा डाइनिंग टेबल रखा हुआ था….जिसको चारो तरफ से बहुत सी लड़कियों ने घेर रखा था……
अंदर घुसते ही मस्तानी चाची बोली- ये नयी लड़की है…इसका ज़रा ख़याल रखना.
वहाँ मौजूद सभी लड़कियों ने हाथ हिला कर मेरा अभिवादन किया….
ऊन्मेसे एक लड़की ने मुझे बोला- हेलो मेरा नाम स्वीटी है और मैं यू.पी. से हू…तुम यहाँ बैठ जाओ.(उसने अपने पास रखी एक कुर्सी मेरे लिए सॉफ करती हुई बोली)
मैने मस्तानी चाची की तरफ देखा- तो उन्होने ने मुझे जाकर बैठने की अनुमति दे दी…और मैं भी उसके पास जाकर बैठ गयी….टेबल पर खूब सारा नाश्ता और वाइन की बॉटल रखी हुई थी..
कुछ लाडियाँ सिर्फ़ ग्लास मे वाइन ही पी रही थी..उन मे से एक लड़की ने अपनी वाइन ख़तम करके और ग्लास रखते हुए(लगभग पटकते हुए) कहा….हाई..बिजली फ्रॉम मुंबई…
मैने भी उसे सिर हिलकर सिर्फ़ हाई कह दिया..फिर बाकी लड़कियाँ भी अपना-अपना इंट्रोडक्षन देने लगी..
हाई..छोटी फ्रॉम पुणे.. काँटा फ्रॉम गोआ….कासिष फ्रॉम गुजरात..लगभग हर स्टेट की लड़कियाँ थी उस जगह पर..
तभी एक मोटी सी औरत हाथ मे चॉक्लेट केक लाती हुए मेरे पास आई और बोली लो काटो इसे…ये तुम्हारे आने की ख़ुसी मे..मैं यहाँ हर किसी के आने की खुशी मे कुछ ना कुछ बनाती हू…आज तुम्हारे लिए चॉक्लेट केक बनाया है…काटो इसे और एंजाय करो अपना पहला दिन यहाँ……तभी बाजू वाली लड़की ने जिसने मुझे कुर्सी दी थी..मेरे ग्लास मे वाइन भरा और मुझे ऑफर किया..मैने ग्लास लिया फिर सब ने टोस्ट किया और अपनी-अपनी वाइन पीने लगे…
बिजली ने फिर जीभ से ऐसे किया जैसे वो किसी की योनि मे जीभ डाल कर हिला रही हो….और फिर मुझसे बोली..क्या तुम्हे ये करना आता है ???
मैने सिर नीचे झुककर हां कह दिया…..वो बोली….तुम्हारा नाम क्या है….
मैने बोलने ही वाली थी के मस्तानी चाची बोली- नाम ही सब कुछ नही होता…इसका नाम है राधा…पर अब से हम सब इसे कामिनी कह कर बुलाएँगे.
मैं बोली- कामिनी ???
हां कामिनी, क्यूकी तुम दिखती कामुक हो…तुम्हारी काया कामुक है…तुम बिल्कुल इस चॉकलॅटी केक की तरह हो जिसे हर कोई खाना चाहता है..
तभी छोटी ने शरारती नज़रो से मेरे उभारो को देखकर मुझसे कहा- क्या तुम मुझे ये चॉकलॅटी केक थोड़ा सा दोगि..और सभी खिलखिला कर हंस पड़े…..
मस्तानी चाची ने कहा- यहाँ सभी लाडियाँ अपने काम से जानी जाती है…उनका नाम ही उनका काम भी उजागर कर देता है….जैसे तुम कहाँ से हो..तुम्हारा नाम क्या है…और वो समझ जाते है कि उन्हे तुमसे क्या लेना चाहिए…तुम उन्हे कैसे मज़ा दे सकती हो…समझी….
तभी एक लड़की ने अपना टॉप उपर किया और अपने स्तनो को अपने हाथो से हिलाते हुए बोली…मेरा नाम है बबली..और मैं महबूब नगर से हू….और फिर सब हंस पड़े..
यहाँ हर कोई जानता है, सकीना को सक करने मे माहिर होने के लिए….ललिता को वर्ग और श्रेणी के लिए…और साथ ही गंदी सोच के लिए भी..हा हा हा…कहकर वो हस्ने लगती है..तो बाकी भी खिलखिला पड़ी..
फिर वो बोली…और कामिनी तुम्हारी खूबी रहेगी ये तुम्हारी मादक गान्ड(ऐसा बोलते हुए वो मेरी एक पूरी गान्ड को अपने हाथो मे मसल रही थी..) तुम अपनी गान्ड लेहराओ, तुम्हे कभी भी इस बात का पछतावा नही होगा..
कासिष ने अपने हाथ की दो उंगलियाँ अपने नाक पे लगाकर ऐसे इशारा किया जैसे वो नाक से सिगरेट पी रही हो और बोली…अगर कस्टमर ने ऐसे इशारे किए तो….
मैं बोली—इसका क्या मतलब हुआ…
चाची बोली—इसका मतलब वो तुमसे कुछ भद्दी चीज़ें करवाना चाहता है..जैसे पिसिंग, शिटिंग एट्सेटरा….लेकिन हां इसके चार्जस एक्सट्रा लगते है और ये है भी बहुत एक्सपेन्सिव ! (ये बताते हुए उन्होने अपनी नाक पे हाथ रख लिया था.)
बबली ने तीन उंगलियाँ मेरे गालों मे रखते हुए बोली…गालों पर तीन उंगलियाँ मतलब..कस्टमर को स्केल मार्कर उत्तेजित करना होता है..
कभी-कभी तो तीन लोग एक साथ होते है जिसे हम थ्रीसम कहते है…जिसमे कस्टमर अपना लिंग तुम्हारी गान्ड मे डाले रखता है..और दूसरी लड़की उसको स्केल से हल्का-हल्का उसकी गान्ड पर मार-मारकर उत्तेजित करती रहती है..उस लड़की के भी एक्सट्रा चार्जस लगते है…..
काँटा कहती है…मैं चली आराम करने !!…हमे भी आराम करना है कहकर बाकी लड़कियाँ भी जाने लगती है..
तभी स्वीटी जो मेरे बाजू मे बैठी रहती है मुझसे कहती है…तुम बहुत अच्छी हो, सुंदर हो..हम बहुत अच्छे दोस्त बनेंगे..
मैं बोली—मैं भी यही चाहती हू, मेरा भी कोई अच्छा दोस्त बने..
मेरे पीछे एक लड़की आई जिसे मैने अभी तक तो नही देखा था यहाँ…सिर्फ़ सलवार पहने और उपर से बिल्कुल नंगी थी सिवायि उस चुन्नी के जो उसके कंधे पे झूल रही थी…उसके स्तन पूरे लटके हुए थे..लेकिन गोल-गोल थे…उसने मुझसे कहा—तुम्हे कोई बुड्ढ़ा आदमी मिला है??…कोई दलाल जो तुम्हारे पैसे यहाँ से ले जाए..
मैने ना मे सिर हिला दिया…..और उसने एक लड़की जिसका नाम सोनिया था..उसे उठा कर वहाँ से ले गयी…
तभी वो बुद्धि औरत जिसने गेट पे मेरा सामान लिया था..मूह मे सिगरेट दबाए..थोड़ा सा लंगड़ते हुए मेरे पास आई और बोली..डॉक्टर साहिब आ गये है..
चाची मुझसे बोली—चलो डॉक्टर साहिब के पास चलते है..और बाकी लड़कियाँ को भी कहा..के वो भी अपना-अपना वीक्ली चेक-अप करवा ले..
और हम दोनो डॉक्टर के पास जाने के लिए निकल पड़ते है…………… चाची मुझे सीढ़ियों से होते हुए नीचे ले गयी….जहाँ सीढ़ियों के बाजू मे एक कमरा था..कमरे के पास पहूचकर चाची ने दरवाज़ा खटखटाया…..ठक..ठक..ठक…दरवाज़ा अंदर से खुला था…तो चाची ने मेरा हाथ पकड़कर मुझे भी अपने साथ अंदर ले गयी.
चाची बोली- ये नयी लड़की आई है आज.
पर्दे के पीछे से आवाज़ आई-अपने कपड़े उतारो…ये सुनते ही मुझे हल्की सी झिझक महसूस हुई…लेकिन जब चाची ने मुझसे कहा तो मुझे उतारना ही पड़ा.वो मुझे एक बड़े से डाइनिंग हॉल मे ले गयी….जहाँ एक बढ़ा सा डाइनिंग टेबल रखा हुआ था….जिसको चारो तरफ से बहुत सी लड़कियों ने घेर रखा था……
अंदर घुसते ही मस्तानी चाची बोली- ये नयी लड़की है…इसका ज़रा ख़याल रखना.
वहाँ मौजूद सभी लड़कियों ने हाथ हिला कर मेरा अभिवादन किया….
ऊन्मेसे एक लड़की ने मुझे बोला- हेलो मेरा नाम स्वीटी है और मैं यू.पी. से हू…तुम यहाँ बैठ जाओ.(उसने अपने पास रखी एक कुर्सी मेरे लिए सॉफ करती हुई बोली)
मैने मस्तानी चाची की तरफ देखा- तो उन्होने ने मुझे जाकर बैठने की अनुमति दे दी…और मैं भी उसके पास जाकर बैठ गयी….टेबल पर खूब सारा नाश्ता और वाइन की बॉटल रखी हुई थी..
कुछ लाडियाँ सिर्फ़ ग्लास मे वाइन ही पी रही थी..उन मे से एक लड़की ने अपनी वाइन ख़तम करके और ग्लास रखते हुए(लगभग पटकते हुए) कहा….हाई..बिजली फ्रॉम मुंबई…
मैने भी उसे सिर हिलकर सिर्फ़ हाई कह दिया..फिर बाकी लड़कियाँ भी अपना-अपना इंट्रोडक्षन देने लगी..
हाई..छोटी फ्रॉम पुणे.. काँटा फ्रॉम गोआ….कासिष फ्रॉम गुजरात..लगभग हर स्टेट की लड़कियाँ थी उस जगह पर..
तभी एक मोटी सी औरत हाथ मे चॉक्लेट केक लाती हुए मेरे पास आई और बोली लो काटो इसे…ये तुम्हारे आने की ख़ुसी मे..मैं यहाँ हर किसी के आने की खुशी मे कुछ ना कुछ बनाती हू…आज तुम्हारे लिए चॉक्लेट केक बनाया है…काटो इसे और एंजाय करो अपना पहला दिन यहाँ……तभी बाजू वाली लड़की ने जिसने मुझे कुर्सी दी थी..मेरे ग्लास मे वाइन भरा और मुझे ऑफर किया..मैने ग्लास लिया फिर सब ने टोस्ट किया और अपनी-अपनी वाइन पीने लगे…
बिजली ने फिर जीभ से ऐसे किया जैसे वो किसी की योनि मे जीभ डाल कर हिला रही हो….और फिर मुझसे बोली..क्या तुम्हे ये करना आता है ???
मैने सिर नीचे झुककर हां कह दिया…..वो बोली….तुम्हारा नाम क्या है….
मैने बोलने ही वाली थी के मस्तानी चाची बोली- नाम ही सब कुछ नही होता…इसका नाम है राधा…पर अब से हम सब इसे कामिनी कह कर बुलाएँगे.
मैं बोली- कामिनी ???
हां कामिनी, क्यूकी तुम दिखती कामुक हो…तुम्हारी काया कामुक है…तुम बिल्कुल इस चॉकलॅटी केक की तरह हो जिसे हर कोई खाना चाहता है..
तभी छोटी ने शरारती नज़रो से मेरे उभारो को देखकर मुझसे कहा- क्या तुम मुझे ये चॉकलॅटी केक थोड़ा सा दोगि..और सभी खिलखिला कर हंस पड़े…..
मस्तानी चाची ने कहा- यहाँ सभी लाडियाँ अपने काम से जानी जाती है…उनका नाम ही उनका काम भी उजागर कर देता है….जैसे तुम कहाँ से हो..तुम्हारा नाम क्या है…और वो समझ जाते है कि उन्हे तुमसे क्या लेना चाहिए…तुम उन्हे कैसे मज़ा दे सकती हो…समझी….
तभी एक लड़की ने अपना टॉप उपर किया और अपने स्तनो को अपने हाथो से हिलाते हुए बोली…मेरा नाम है बबली..और मैं महबूब नगर से हू….और फिर सब हंस पड़े..
यहाँ हर कोई जानता है, सकीना को सक करने मे माहिर होने के लिए….ललिता को वर्ग और श्रेणी के लिए…और साथ ही गंदी सोच के लिए भी..हा हा हा…कहकर वो हस्ने लगती है..तो बाकी भी खिलखिला पड़ी..
फिर वो बोली…और कामिनी तुम्हारी खूबी रहेगी ये तुम्हारी मादक गान्ड(ऐसा बोलते हुए वो मेरी एक पूरी गान्ड को अपने हाथो मे मसल रही थी..) तुम अपनी गान्ड लेहराओ, तुम्हे कभी भी इस बात का पछतावा नही होगा..
कासिष ने अपने हाथ की दो उंगलियाँ अपने नाक पे लगाकर ऐसे इशारा किया जैसे वो नाक से सिगरेट पी रही हो और बोली…अगर कस्टमर ने ऐसे इशारे किए तो….
मैं बोली—इसका क्या मतलब हुआ…
चाची बोली—इसका मतलब वो तुमसे कुछ भद्दी चीज़ें करवाना चाहता है..जैसे पिसिंग, शिटिंग एट्सेटरा….लेकिन हां इसके चार्जस एक्सट्रा लगते है और ये है भी बहुत एक्सपेन्सिव ! (ये बताते हुए उन्होने अपनी नाक पे हाथ रख लिया था.)
बबली ने तीन उंगलियाँ मेरे गालों मे रखते हुए बोली…गालों पर तीन उंगलियाँ मतलब..कस्टमर को स्केल मार्कर उत्तेजित करना होता है..
कभी-कभी तो तीन लोग एक साथ होते है जिसे हम थ्रीसम कहते है…जिसमे कस्टमर अपना लिंग तुम्हारी गान्ड मे डाले रखता है..और दूसरी लड़की उसको स्केल से हल्का-हल्का उसकी गान्ड पर मार-मारकर उत्तेजित करती रहती है..उस लड़की के भी एक्सट्रा चार्जस लगते है…..
काँटा कहती है…मैं चली आराम करने !!…हमे भी आराम करना है कहकर बाकी लड़कियाँ भी जाने लगती है..
तभी स्वीटी जो मेरे बाजू मे बैठी रहती है मुझसे कहती है…तुम बहुत अच्छी हो, सुंदर हो..हम बहुत अच्छे दोस्त बनेंगे..
मैं बोली—मैं भी यही चाहती हू, मेरा भी कोई अच्छा दोस्त बने..
मेरे पीछे एक लड़की आई जिसे मैने अभी तक तो नही देखा था यहाँ…सिर्फ़ सलवार पहने और उपर से बिल्कुल नंगी थी सिवायि उस चुन्नी के जो उसके कंधे पे झूल रही थी…उसके स्तन पूरे लटके हुए थे..लेकिन गोल-गोल थे…उसने मुझसे कहा—तुम्हे कोई बुड्ढ़ा आदमी मिला है??…कोई दलाल जो तुम्हारे पैसे यहाँ से ले जाए..
मैने ना मे सिर हिला दिया…..और उसने एक लड़की जिसका नाम सोनिया था..उसे उठा कर वहाँ से ले गयी…
तभी वो बुद्धि औरत जिसने गेट पे मेरा सामान लिया था..मूह मे सिगरेट दबाए..थोड़ा सा लंगड़ते हुए मेरे पास आई और बोली..डॉक्टर साहिब आ गये है..
चाची मुझसे बोली—चलो डॉक्टर साहिब के पास चलते है..और बाकी लड़कियाँ को भी कहा..के वो भी अपना-अपना वीक्ली चेक-अप करवा ले..
और हम दोनो डॉक्टर के पास जाने के लिए निकल पड़ते है…………… चाची मुझे सीढ़ियों से होते हुए नीचे ले गयी….जहाँ सीढ़ियों के बाजू मे एक कमरा था..कमरे के पास पहूचकर चाची ने दरवाज़ा खटखटाया…..ठक..ठक..ठक…दरवाज़ा अंदर से खुला था…तो चाची ने मेरा हाथ पकड़कर मुझे भी अपने साथ अंदर ले गयी.
चाची बोली- ये नयी लड़की आई है आज.
पर्दे के पीछे से आवाज़ आई-अपने कपड़े उतारो…ये सुनते ही मुझे हल्की सी झिझक महसूस हुई…लेकिन जब चाची ने मुझसे कहा तो मुझे उतारना ही पड़ा.
मैं आगे बढ़कर अपनी फ्रॉक उतारने लगी..और चाची मुझे वहाँ अकेला छोड़कर दरवाज़ा से बाहर चली गयी…
पर्दे के पीछे से वो शक्स निकाला जिसने मुझे कपड़े उतारने के लिए कहा था..पहनावे से वो डॉक्टर ही लग रहा था…बड़ी सी धड़ी थी उसकी…शकल से शरीफ लग रहा था..
मैं अभी अपने कपड़े उतार ही रही थी…उसने पूछा – इस घर मे नयी हो या बिल्कुल ही नयी हो ?
मैने कहा- आज पहला दिन है मेरा….और मैने लगभग अपने सारे बटन्स खोल लिए थे..उस बुड्ढे से डॉक्टर को देखकर मेरा डर थोड़ा दूर हो गया था..और मैं थोड़ा खुश भी हो गयी थी…
वो बोला- तुम्हारी ख़ुसी देख कर तो लग रहा है..तुम यहाँ पार्टी करने आई हो…और वो फिर अपने काम मे व्यस्त हो गया.
फिर वो बोला- बहुत अच्छी नौकरी ढूंढी है तुमने क्यू ??
मैने उसे यूही कह दिया..परिवारिक वजहों के कारण हू यहाँ मैं…मा बीमार है, पिताजी का देहांत हो चुका है इसीलिए…तब तक मैने बाकी सारे कपड़े भी उतार लिए थे..
फिर उसने अपने गले मे लगा स्तेथॉस्कोपे को मेरे पीठ मे लगाकर कहा—गहरी साँस लो.
मैने कहा- मेरा पास इसके सिवा और कोई रास्ता नही था.
तुम्हारी ये गहरी साँसे मुझे तुम्हारी वास्तविकता से पहचान करा रही है. डॉक्टर बोला.
मैने ऐसी कहानी केयी बार सुनी है…वो बोला.
मैने गंभीर होकर कहा- मैं सच कह रही हू.
फिर उसने अपने सामान मे से एक टॉर्च निकाला और मेरे मूह मे कुछ देखने लगा और बोला- तुम्हे जो कहना था तुमने कह दिया..और मुझे उस पर ज़रा भी विश्वास नही है. मुझे सब सच-सच जानना है.
वो मेरी बातों पे यकीन ही नही कर रहा था..और मेरी आँखों के चेक करते हुए मुझे सच बताने पर मजबूर कर रहा था, तब मैने भी सोचा के इसे सच बता ही दिया जाए और बोलने लगी- मैं ये सब कुछ अपने होने वाले पति के लिए कर रही हू..वो एक एलेक्ट्रीशियन है..और उन्हे थोड़े पैसो के ज़रूरत है.
वो मेरे कंधो का निरीक्षण करने लगा और मैं बोले जा रही थी- उसके बॉस ने उसको शहर मे अपनी दुकान बेच दी है उसकी के लिए पैसो की ज़रूरत है…तो हमने सोचा..
वो बोल पड़ा- तो तुमने सोचा, कि इस काम से जल्दी पैसे मिल जाएँगे…बहुत बढ़िया !!
थोड़ा चल के दिखाओ ,वो बोला.
चलते हुए मैं बोली- सिर्फ़ 15 दिनो की तो बात है. उसके बाद वो मुझे यहाँ से ले जाएगा और हम शादी कर लेंगे.
डॉक्टर बोला- किसका विचार था ये ?
मैने कहा- मेरा, मेरा मतलब राज का….मुझे अच्छा लगा तो मैने हां कह दी.
चलो ठीक है…लेट जाओ..….तो मैं लेट गयी, वहाँ पड़े स्ट्रेचर पे, वो बोला- तुम्हे पता है राज ने कैसा काम किया है ? एक दलाल के जैसा…और वो मेरे शरीर को जाँचने-परखने लगा.
मैं थोडा चिड़ गयी थी उसकी बातों से, मैं बोली- तुम उसे जानते भी नही हो तो तुम ऐसा कैसे कह सकते हो.
तो वो बोला-तुम खुद सोचा के तुम क्या करने जा रही हो. जो तुमने आज तक नही किया..कभी सपने मे भी नही सोचा होगा…तुम चाहो तो तुम अभी इसे छोड़कर जा सकती हो..कोई तुम्हे रोकेगा भी नही.
लेकिन ये मेरा फ़ैसला है-मैं बोली.
तुम एक सुंदर, खूबसूरत, जवान, स्वस्थ, तंदुरुस्त लड़की हो…क्यू अपनी जिंदगी अपने हाथो बर्बाद कर रही हो ??…ऐसा बोलते हुए वो मेरे पैरों का निरीक्षण कर रहा था.
उसने मुझे जाँघो से लेकर अंगूठे तक छुआ, लेकिन उसके चुअन से मुझे कोई फरक नही पड़ा.
मैने कहा- सिर्फ़ 15 दिनो की ही तो बात है.
तो, वो बोला- अरे बेवकूफ़ लड़की, तुम ये सब फिर कभी भी नही छोड़ पओगि!…और वो मेरे जाँघो को ज़ोर-ज़ोर से दबाने लगा.
मैं थोड़ा सहम गयी थी उसकी बातों से मैं बोली – तुमने मुझे डरा दिया है. अब मैं क्या करू ?
भगवान से मदद माँगो, अगर तुम उन पर विश्वास करती हो तो.
तभी मैं उठकर बोली- मैं अपना ख़याल खुद रख सकती हू! तुम्हे पता है, मुझे पैसे क्यू चाहिए ?…क्यूकी मेरे पिता ने अपना सब कुछ लूटा दिया था इन वेश्याओं पे!
और तुम यहाँ वोही सब वापस पाने आई हो ? डॉक्टर बोला.
सही कहा, कम से कम कुछ तो ले ही सकती हू. क्या इसमे भी कोई ग़लत बात है ? मैने कहा.
क्या व्यक्तित्व है तुम्हारा!……..तुम्हे पता है, वो सब कॉनडम्स नही पेहेन्ते है….क्या करोगी अगर तुम प्रेगनेंट हो गयी ? उसने पूछा.
मैं अपने आपको गोली मार दूँगी, मैं बोली.
उसकी कोई ज़रूरत नही है, तुम बस इसे पहेन लेना.
उसने हाथ मे एक लॅडीस कॉंडम पकड़े रखा था…मैने इसे पहले कभी देखा तो नही था..लेकिन इसके बारे मे थोड़ा बहुत सुना ज़रूर था.
मैने तुरंत उसे पूछा- क्या ये दर्द करेगा ?
उसने मुझे स्ट्रेचर पर धक्का देते हुए लेटा दिया और कहा- नही! बस तुम्हारी योनि गीली होनी चाहिए ताकि ये आसानी से अंदर जा सके.
फिर उसने मेरी योनि के दाने को अपनी एक उंगली से मसलना शुरू किया…मैं तो बस फिर मज़े मे खोती ही जा रही थी. उसकी एक उंगली दाने पे और दूसरी उंगली योनि पे चल रही थी..मेरे मूह से सिसकारी भरी आहें निकल रही थी.
उसने बड़े ही शालीनता से पूछा- क्या तुम्हे इससे चोट पहुच रही है ?
TO BE CONTINUE……………
