पैंटी उतारी और अपनी उंगली से,,,

मैं- हाय…

रवि- हैलो…

मैं- कैसे हो?

रवि- मैं ठीक हूँ आप कैसे हो?

मैं- मैं भी ठीक हूँ…

फेसबुक पर बातों की कुछ ऐसी ही बातों से शुरुआत होती थी, मेरी और रवि की..

हम एक-दूसरे से कभी मिले नहीं थे. बस फेसबुक पर ही हम दोनों की रोज बात होती थी. अगर मैं एक दिन उससे बात न करती तो दिन नहीं पूरा होता था. हम एक-दूसरे को बहुत पसंद करते थे. मैं अपनी हर बात उसे बताती थी. यहाँ तक कि हम सेक्स चैट तक कर चुके थे. हम दोनों ने एक-दूसरे के एक-एक अंग को अपनी-अपनी कंप्यूटर स्क्रीन पर देखा था.

आपको बता दूँ कि रवि पेशे से एक सॉफ्टवेयर इंजिनियर था. वो जालंधर (पंजाब) में रहता था. मैं स्कूल में अध्यापिका के तौर पर लुधियाना में पढ़ाती हूँ. हम दोनों को एक-दूसरे के साथ बात करते हुए तक़रीबन एक साल से ज्यादा का समय हो चुका था.

एक दिन रवि का मुझे फ़ोन आया और उसने मुझे बताया कि मैं बहुत जल्द काम के सिलसिले में लुधियाना आ रहा हूँ.

मैं उसके लुधियाना आने की खबर सुन कर बहुत खुश हुई और उस दिन का इंतज़ार करने लगी.
कुछ दिन बाद मुझे उसने फ़ोन करके कहा- वो लुधियाना पहुँच चुका है. वो यहाँ अपने भाई के पास है.
उसने मुझसे दो दिन बाद मिलने का वादा किया.

आखिर वो दिन आ ही गया, जिस दिन का मुझे बड़ी बेताबी से इंतज़ार था. मैंने उसे एक रेस्तरां में आने को कहा.

वो समय पर वहाँ पहुँच गया, उसे देखकर मैं बहुत खुश हुई.

वो दिखने में बहुत सुन्दर लग रहा था. हम दोनों ने काफी पी और गप्पें मारने लगे. बातें करते-करते वो टेबल के नीचे अपनी टांगों से मेरी स्कर्ट ऊपर कर रहा था, मैं भी मुस्कुरा कर अपनी टाँगे पीछे कर लेती थी.

उसने मुझे कहा- आज तुम मुझे लुधियाना घुमाओ.

मैंने भी उसे ‘हाँ’ कर दी.

रेस्तरां से बाहर निकल कर मैंने उससे कहा- तुम कहाँ जाना पसंद करोगे?

उसने कहा- क्यूँ ना लुधियाना घूमने की शुरूआत तुम्हारे घर से की जाए?

मैं उसका इशारा समझ चुकी थी.

मैंने कहा- ठीक है.

क्यूंकि मेरे घर में मैं और मेरी सहेली ही रहती थी. मैंने झट से अपनी सहेली को फ़ोन किया कि वो वहाँ पर सारा इंतजाम कर दे और वहाँ से रफा-दफा हो जाए, क्यूंकि मैं रवि को किसी और के साथ बांटना नहीं चाहती थी.

फिर हम दोनों ने ऑटो किया और मेरे घर की तरफ रवाना हो गए.

रास्ते में मैं यह सोच-सोच कर खुश हो रही थी कि आज मेरी प्यासी चूत को मोटा ताज़ा लंड मिलेगा.

घर पहुँचने पर मैंने उसे सोफे पर बिठाया और खुद फ्रेश होने के लिए चली गई.

मैं बाथरूम में यह सोच रही थी कि आखिर किस तरह उसे अपने जाल में फंसाया जाए. मैंने लाल रंग का गाउन पहना और बाहर आ गई. बाहर आकर मैंने उसके सामने पीठ दर्द का नाटक किया.

उसने हँसते हुए कहा- क्यूँ न मैं तुम्हारी पीठ दबा दूँ.

मैंने उसे ‘हाँ’ कह दिया.

मैं उसे अपने बेडरूम में लेकर आ गई और बेड पर पेट के सहारे लेट गई.

उसने मेरी पीठ पर जैसे ही हाथ रखा, मेरे तो तन-बदन में जैसे एक आग दौड़ गई, क्यूंकि मुझे किसी गैर मर्द ने पहली बार हाथ लगाया था. उसने मेरी बरसों की वासना को भड़का दिया.

फिर कुछ देर पीठ को दवबाने के बाद मैंने उससे कहा- मैं अपना गाउन उतार देती हूँ ताकि तुम्हें बदन दबाने में आसानी हो!

मैंने झट से अपना गाउन उतार दिया.

अब मैं सिर्फ ब्रा और पैंटी में ही थी और वो मुझे घूर-घूर कर देख रहा था.

मैंने भी उस का उभरा हुआ लंड देख लिया था. अब मुझे और भी मज़ा आने लगा.

मैंने उससे कहा- क्यूँ न तुम भी अपने कपड़े उतार दो..!

पहले तो वो शरमाया लेकिन मेरे थोड़ा कहने पर उसने अपने कपड़े उतार दिए, सिवाए अंडरवियर के. मैंने उसके अंडरवियर के अन्दर फूले हुए लण्ड को देखा, फिर मैंने उससे कहा- मेरी ब्रा भी खोल दो…!

उसने झट से ब्रा को खोल दिया और मैं पीठ के बल लेट गई. वो मेरे मम्मों को देखता रहा.

मैंने उससे कहा- ज़रा मेरे मम्मों भी दबा दो!

उसने बड़े ही मुलायम हाथों से मेरे मम्मों को दबाया. थोड़ी देर मेरे मम्मों दबाने के बाद मैंने उस का लंड पकड़ लिया तो वो हैरान हो गया.

मैंने उससे कहा- इसमें हैरान होने की कोई बात नहीं है. तुमने भी तो मेरे मम्मों को दबाया है. अब मैं भी तुम्हारा लंड दबाऊँगी!

मैंने उसका अंडरवियर उतारा और उसका लंड अपने मुँह में ले लिया और उसे चूस-चूस कर उस का पानी निकाल दिया!

फिर मैंने उसे कहा- अब तुम्हारी बारी…

उस ने मेरी पैंटी उतारी और अपनी उंगली से मेरी चूत को चोदने लगा. मैं जोश के कारण ‘आआहआ ऊऊ… ऊऊ अहह… हहाहा म्म्म्म..’ कर रही थी.

फिर मैं भी झड़ गई और उसने मेरा सारा पानी पी लिया. फिर हम लोग एक-दूसरे से लिपट कर लेटे रहे.
फिर कुछ देर के बाद मैंने उसको एक स्प्रे दिया जो मेरा पति इस्तेमाल करता था.

वो स्प्रे लंड पर छिड़कने से लंड तकरीबन एक घंटे तक अपना पानी नहीं छोड़ता है. फिर मैंने वो स्प्रे उसके लंड पर छिड़का और उस का लंड खड़ा हो गया.

अब मैंने अपनी टांगें फैला लीं और उसे अपनी चूत का द्वार दिखाया. मैंने उसे इशारा किया कि वो अपना लंड मेरी चूत में डाल दे. उसने अपना लंड मेरी चूत के द्वार पर रखा और एक झटका मारा.

मेरे मुँह से एक चीख निकली, “आआआआ…!” मैंने 6 महीने से लंड नहीं खाया था न, इसी लिए. उसने एक और धक्का मारा जिससे कि उसका लंड मेरी चूत में समा गया. मैंने उस का लंड वैसे ही अपनी चूत में रहने दिया और फिर दो मिनट के बाद उसने मुझे चोदना शुरू किया.

‘वाह…! क्या मज़ा आ रहा था…! मैं तो जैसे स्वर्ग में थी…!

मेरे मुँह से ‘आआआ ऊऊऊ म्मम्म्ममअहहह’ की आवाजें निकलने लगीं. जोश के कारण मैं बोलने लगी- और चोदो.. और चोदो… और चोदो…!

उसने कहा- ले रांड..! और ले… खा मेरा लंड..!

फिर उस ने मुझे कुतिया बनाया और मुझे खूब चोदा.

फिर तकरीबन एक घंटे बाद वो झड़ने वाला था तो उसने मुझसे कहा- मैं झड़ने वाला हूँ!

उसके झड़ने से पहले ही मैं तीन बार झड़ चुकी थी, तो मैंने उसे कहा- मेरी चूत में ही झड़ जाओ!
वो मेरी चूत में ही झड़ गया.

मैंने उस रात उससे चार बार चुदवाई और आज भी मैं उससे चुदाती रहती हूँ.

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