मेरी म्ररीज

मेरी म्ररीज

मेरा नाम मनीश हे ओर मे एक डाक्टर हू जो ज्वान भी हे ओर खू्बसूरत भी
मेरा लड तडपता रह्ता था कि केसे कोयी लड्की मिले ओर मे उसे चोदू पर साला मोका नही मिल पा रहा था
कयी ओर्तो को देख के ळ्ड स्लामी देने लग्ता था पर कुच कर नही पाता था…उन्के जाने के बाद एग्जामिनेशन रूम मे जा के हाथ से काम चलाना पड्ता था
वेसे तो मेरी रिसेप्शन वाली लड्की भी पटाखा थी पर बदनामी के डर से चु्प था वर्ना साली को चोद चोद के कया बना डालता
खेर यह कहानी उस एक रोज की हे जब एक लड्की ने appointment ली…शाम सात बजे की
उसका नाम यशिका था ओर उसके मममो मे गिल्टिया थी दोनो तरफ़.वो आप्रेशन नही करवाना चाह्ती थी
इसलिये मेरे पास आई थी
अब होता क्या हे की शाम को साडे सात बजे मेरी लेडी असिस्टेन्ट चली जाती हे जो सीखने मेरे पास आती थी
यशिका सही समय पर आ गयी ओर बाहर इतजार करने लगी..मुझे सवा सात बज गये पहले मरीज को चे्क करते करते ओर वो लेट होने लगी
वो बाहर काउन्टर पर पूछःने लगी की कि्तनी देर लगेगी..उस्ने मुझे काल कर के पूछा सर क्या देर लगेगी मरीज वेट कर रही हे…मेने परदे से देखा तो वो एक 5 फ़ुट 8 इच कद की लड्की थी जिसने टाइट जीन्स ओर टाप डाला हुआ था बाल खुले थे उसकी ब्रा का साइज कम से कम 36 जरूर ही होगा…उसके बट भी 38 तो होगे ही…उस्को देख के मेरा पापी ओर दुशट लड अगडायी लेने लगा …क्या माल हे यार…एक सेकड के लिये भूल गया के साले डाक्टर हे तु ओर क्या सोच रहा हे ..मेने ज्वाब दिया बस 5 मिट लगेगे उनको बोलो वेट करे अभी बुलाता हू
यशिका ने सुन के मुह सा बनाया ओर खडी रही
मेने झट से मरीज को फ़ारिग किया ओर असिस्टेट को बोला बुलाओ यशिका को … वो बोली ठीक हे सर भेजती हू पर सर मे जाउ आज जरा जल्दी जाना हे…मे तो यही चाह्ता था…मेने कहा जाओ…उसने केबिन खोला ओर बाहर चली गयी॥मेने फ़टाफ़ट खुद को जरा दरुसत सा किया ..इतने मे अवाज आयी सर क्या मे अदर आ जाउ…मेने देखा तो बस देखता ही रह गया …एक गुलाबी चेहरा लिये ओर वो ही नेन नकश लिये जो मेने देखे थे यशिका खडी थी ..मेरा लड एक दम टाइट सा हो गया
मेने बोला येस प्लीज डू कम इन
वो अदर आगयी ओर बेठ गयी ..एक दम सीधी ओर तन के …उसके मममे एक्दम बाहर की तरफ़ ..पेट उसका अदर की तरफ़..उस्की टाप काफ़ी टाइट थी सारी ब्रा की किनारी तक दिख रही थी ओर मममो के उभार जो छोटी ब्रा से बाहर निकल रहे थे वो तक दिख् रहे थे..उफ़्फ़ उसे देख के माथे पे पसीना सा झलक गया ए सी मे भी गरमी सी लगनी शुरु होगयी ..उसने एक टाग दूसरी टाग पर चडा ली ओर दोनो हाथ टाग पर रख के बेठ गयी
मेरे लड का बुरा हाल हो गया था इतनी सेक्सी ओर मा्दर चोद लड्की मेने पूरी लाइफ़ मे नही देखी थी

मेने उसका कार्ड बनाया ओर हाल पूछा
वो बोली सर मेरे दोनो बूब्स मे गिल्टिया हे क्या ये ठीक हो सकती हे..मे कयी जगह से दवाई ले चूकी हू पर सभी फ़ेल होगये अब आप बताओ
मेने कहा नही कोई बात नही ये ठीक हो जायगी
आप घबराओ मत हम पूरी कोशिश करेगे की आपको आप्रेशन ना करवाना पडे पहले भी ऎसे केसिस ठीक हुये हे डोट वरी यु विल बी फ़ाइन
वो थोडी रिलेकस होगयी
पर आपको एक बार कल आना पडेगा चेक करवाने के लिये क्युकी आज मेरी असिस्टेट जा चुकी हे
वो बोली सर चेक क्या करना हे गिल्टिया हे बस उसकी दवाई दे दो
मेने सम्झाया नही यशिका ऎसे नही होता हमे देख्नना होता हे गिल्टी केसी हे गोल हे लम्बी हे नरम हे या सखत हे प्लेन हे या खुरदरी हे कोई जड तो नही हे व्गेरा व्गेरा
वो बोली तो सर आप नही चेक कर सकते
ये सुन के मेरे तो मुह से पानी नि्कल्ने लगा के ये तो खुद ही तेयार हे भाईजान
पर ऊपर से सीरिअस रहने का नाटक करते हुये कहा आपको अचछा नही लगेगा इसलिये बोला ऎसा
वो बोली नो प्राब्लम सर आप चेक कर लो मुझे कोई प्राब्लम नही हे
मेने उसे बोला ठीक हे फ़िर आप अदर रूम मे जा के चेक अप वाले कपडे डाल लो ..मे आता हू
वो बोली ठीक हे सर…वो दरवाजा खोल के अदर चली गयी
ओर उसके अदर जाते ही मेने अपने केबिन का दरवाजा अदर से लाक कर लिया ताकि कोई अदर ना आ जाये

ओर इतजार करने लगा के वो चेज कर तो मे अदर जाउ..मे इत्जार कर ही रहा था कि रिसेप्शन से फ़ोन आया ” सर मे जा सकती हू कुछ जरूरी काम था घर पर …मेने सोचा साला आज सब कुछ मेरे मुताबिक केसे हो रहा हे…मेने कहा ठीक हे जाओ ..बाहर “क्लीनिक बद हे” का साइन लगा के जाना
वो बोली ठीक हे सर
मेरी तो साली लाटरी निकल आई जेसे
के आज अगर ये साली यशिका पट गयी ना तो मजा आ जायेगा
सोच ही रहा था की अवाज आई ” आ जाईए सर मेने चेज कर लिया
मेरा दिल धक धक करने लगा ..पहले कभी चोदा तो था नही ..बस कहानिया या मूवी देखी थी ..
इतने मे यशिका के मममो का ख्याल आगया तो लड एक्दम तन गया सोचा आज तो जेसे भी हो ठोक्ना ही हे

मेने अप्ना स्टेथोस्कोप लिया ओर दरवाजा हल्के से खोला तो देखा उसने अपनी टाप उतार कर लूज गाउन डाल लिया था पर जीन्स नही उतारी थी…साली क्यामत लग रही थी..अदर पखे की हवा मे उसके बाल उड रहे थे …लबी लड्की खुले बाल टाइट जीन्स हाय लड तो बस फ़ट ही जाता पर सबर करना भी जरूरी था
मेने कहा ” यशिका बेड पर लेट जाओ” बहुत सीरिअस हो कर कहा ताकि वो मे जो कहु वो करे
वो लेट गयी मे उसकी साइड पर आगया ओर गाउन उठाया पर यह कया उसने काले रग की ब्रा तो उतारी ही नही थी
मेने कहा ” यशिका यह उतारो ..चेक केसे होगा ”
वो बोली ” सर एसे ही चेक कर लो ना मुझे शरम आती हे”
मे सीरिअस हो के बोला ” डाकटर से शरम नही करते..आपको पता होना चहिये ”
चलो उतारो इसे शबाश”
वो बेड से नीचे आ गयी बिल्कुल मेरे पास …हाय क्या खुश्बु थी उसकी ..हाथ गाउन के अदर डाला ओर पीछे से हुक खोलने की कोशिश करने लगी ..पर हुक बहुत टाइट थी …खुल नही रही थी…मेने सोचा यही मोका हे …जल्दी करो यशिका क्या कर रही हो लेट हो रहा हे..वो शर्मिदा सी हो गयी ओर बोली “सर क्या करु खुल नही पा रही..प्लीज आप थोडी हेलप करो ना
मेने कहा ” मे ..वो केसे ” अजान सा बन के जब मेने कहा तो वो बोली सर आप खोल दो प्लीज
मेने कहा चलो ठीक हे….मे खोल देता हु..वो मुड्ने लगी ताकी उसकी पीठ मेरी तरफ़ हो जाये ..पर मे एक कदम आगे हो के बिल्कुल उसके मुह के पास चला गया ओर उसे मुड्ने का कोई मोका दिये बिना मेने हाथ उसके गाउन के अदर डाले ओर पीछे ले गया जहा उसके हुक्स थी..मेरे एसा करने से हम दोनो एक दूसरे के गले लगे हुये थे तकरीबन तकरीबन ..मेरा खडा हुआ लड उसके शरीर से रगड खा रहा था ओर वो बेड के साथ टेक लगा के ओर हाथ बेड पे जमा के खडी थी ओर मे उसकी हुकस खोलने की जान बझ कर नाकाम कोशिश कर रहा था…मेरे माथे पर ओर उसके माथे पर पसीना चूना शुरु होगया था ..मेरे गाल उसके गालो को छू रहे थे ओर लब हल्की सी रगड खा चुके थे एक बार…

मे थोडा सा पीछे हट के बोला गाउन उतारो यशिका फ़टाफ़ट एसे नही खुलेगी…क्या यशिका इतना टाइम लग गया ..पहले कर लेना चहिये था आपको यह..मे जानबुझ कर जल्दी दिखा रहा था..वो उतारने लगी मेने कहा रहने दो ये भी मे ही उतार देता हु…उसके हा कहने से पहले ही मेने गाउन पकड कर ऊपर उठा दिया..उसको बाजु ऊपर करने पड गये जिससे उसका सारा पेट नगा होगया ओर काली ब्रा सामने दिखाई देने लगी….मेने उसका गाउन उतार दिया…उसने हाथ नीचे कर लिये, मेने वही खडे खडे साइड पर गाउन रखा ओर बोला हाथ उठाओ अपने .. ओर मेने एक झट्के से हुक्स खोल दिये…फ़्टाक..वाआआआआआअ……ओ ओ ओ ओ …उफ़..उसके मममे जेसे दूध हो ..इतने गोरे..एक दम सखत..गोल..तने हुये…बाहर उभरी हुयी चूचिया …ब्राउन रग की..ब्राउन रग के घेरे …हाय मेरा लड …दर्द करने लग गया था ..समझ गया मे के आज तो ये साली चुदेगी ही मर्जी हो इसकी या ना हो …इसकी गाड ओर फ़ुददी तो आज फ़ाड्नी ही हे चाहे जो हो जाये

Leave a Reply

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *