भाभी की चूत

भाभी की चूत

दिलीप अपनी जेब से मोबाइल निकाल के उसमे देखने लगा. उसके मुहं से बड़ी बड़ी गालियाँ निकल रही थी; कौन हैं चूत मार साला की अभी इस वक्त फोन कर रहा हैं. शाम के 8:30 बजे थे और दिलीप को ऑफिस के समय के बाद अपने मोबाइल पे बात करना अजीब सा लगता था. तभी उसने देखा की यह कॉल को जानकी भाभी का हैं. जानकी भाभी उसके दोस्त अल्पेश की बीवी थी. गुज्जू अल्पेश वैसे अमेरिका में बसा हुआ था लेकिन क्यूंकि वो एक फर्जी वीजा के ऊपर गया हुआ था इसलिए वो अपनी बीवी को किसी भी सूरत में वहाँ ले जाने में नाकाम रहा था. जानकी भाभी की चूत में आग लगी थी जैसे की कुछ सालो से लेकिन वो करती भी क्या.

दिलीप ने फोन कान में लगाया, “हेल्लो बोलो भाभी; कैसे हो आप?”

जानकी, “दिलीप भाई आप अभी के अभी मेरे घर पे आ जाओ प्लीज़.”

दिलीप को यह सुन के थोडा अजीब तो लगा लेकिन क्यूंकि दोस्त का मामला था इसलिए उसने अपनी बाइक को किक मारी और वो सीधा जानकी के घर आ गया. बेल बजाते ही जानकी ने दरवाजा खोला. वो एक पतली नाईटी पहने हुई थी जिसके अंदर उसकी सफ़ेद ब्रा थोडा ध्यान से देखने पे तुरंत नजर आ जाती थी. दिलीप ने मुंडी भाभी के चुंचो से हटाई और जानकी भाभी ने दरवाजे से हट के उसे अंदर लिया.

सोफे के ऊपर बैठते ही दिलीप बोला, “क्या हुआ भाभी आप ने ऐसे तुरंत क्यों बुलाया?”

जानकी बोली, “मुझे सच सच बताना यह कलावती कौन हैं?”

दिलीप की गांड फट गई जानकी के मुहं से कलावती का नाम सुन के. दरअसल कलावती अल्पेश की पुरानी गर्लफ्रेंड थी जिसे अल्पेश और उसके सभी दोस्त मिल के चोदते थे. और कलावती की चूत का फेरा दिलीप भैया भी खा के आये थे. उसके मुहं से एक मिनिट तक को जैसे कुछ निकला ही नहीं. जानकी की आँखों में आँखे डाल के जूठ बोलना था उसे जो.

दिलीप: अरे कलावती हमारी क्लासमेट थी, मैं और अल्पेश और कलावती साथ में ही पढ़ते थे.

जानकी: तो आप को पता हैं की अल्पेश और कलावती के नाजायज सबंध शादी के बाद भी थे.

अब दिलीप की गांड और भी फट गई. वो कैसे कहता की जानकी के मइके जाने पर अल्पेश और दिलीप एक दो बार उसे यही पर इस घर में ले के आये थे. और उसकी चूत से थ्रीसम सेक्स के मजे लिए थे. दिलीप अपना सर खुजाते हुए बोला, “भाभी वो अल्पेश की सिर्फ दोस्त थी गर्लफ्रेंड नहीं..! आप को कैसे पता चला यह सब?”

जानकी अब नागिन के जैसे तेज हो के बोली, “मुझे अलमारी की ऊपर से एक तस्वीर और चिठ्ठी मिली जिस में दोनों के प्यार का पंचनामा लिखा हुआ हैं.”

दिलीप अब समझा की यह भाभी इतनी भडकी हुई क्यों हैं. वो कुछ बोलता उसके पहले ही जानकी बोली, “और यह चिट्ठी शादी के पहले की नहीं हो सकती क्यूंकि यह अलमारी मेरे दहज में आई हैं…!”

दिलीप के पास अब कोई स्कोप नहीं था की वो अपने चुदक्कड दोस्त को बचा सके क्यूंकि उसने खुद ही सबूत पीछे छोड़े हुए थे. जानकी की आँखों से आंसू आ गए, “मैं यहाँ दिन रात उनके इन्तजार में रहती हूँ और वो मेरी जानकारी के बहार चूत और लंड के खेल खेलते थे…!”

दिलीप सन्न रह गया जानकी के मुहं से चूत और लंड शब्द सुन के. वो खड़ा हुआ और किचन से पानी भर के लाया. उसने जानकी के कंधे के ऊपर अपना हाथ रखा. जानकी दिलीप की जांघो से लिपट गई; और क्यूंकि व खड़ा हुआ था जानकी का माथा उसके लंड से टकरा रहा था. दिलीप के मन में पहली बार जानकी भाभी के लिए गलत ख्याल आया. उसने सोचा की अगर भाभी की आग को भड़काई जाए तो उस से चुदाई का प्लेटफोर्म तैयार किया जा सकता हैं. उसने जानकी के कंधो को उठाया और पानी का ग्लास उसे दिया. गोरी जानकी पानी पी रही थी और दिलीप उसके गले के अंदर बह रहे पानी को देखता रहा. उसकी नजर थोड़ी निचे गई और उसने जानकी के चुंचो के ऊपर की गली देखी. वो मनोमन सोच रहा था की अगर जानकी भाभी के चुंचे इतने सफ़ेद हैं तो उसकी चूत भी मस्त ही होगी. चूत का ख्याल आते ही उसका लंड खड़ा हो गया. जानकी ने पानी पीया और ग्लास सोफे के पास ही निचे रख दिया और वो फिर से रोने लगी.

दिलीप ने आग बढ़ाते हुए कहा, “भाभी आप की बात सही हैं, मैं अल्पेश से बात करूँगा.”

जानकी: नहीं कुछ बात नहीं करनी हैं किसी से अब मैंने भी डिसाइड किया हैं की मैं भी अब अपनी चूत को और नहीं तड़पाउंगी. मैं भी एक अफेर करुँगी और फिर देखती हूँ की अल्पेश की गांड में कैसी आग लगती हैं.

दिलीप के मन में लड्डू फूटने लगे क्यूंकि यहाँ तो शिकार खुद ही कट जाने के लिए तैयार दीख रहा था. उसने जानकी के कंधे के ऊपर अपने हाथ से सहलाया और बोला, “अरे भाभी आप छोडो यह सब बातें और आराम करो मैं कल आऊंगा आप से मिलने.”

जानकी जो बोली उस से तो दिलीप के लौड़े में आग लग गई जैसे की.

जानकी: दिलीप आप ही मुझे चोद दो आज. आज रात आप यही निकाले मेरे साथ. आप ही मेरी चूत चोद दो प्लीज़. मैं ख्याल रखूंगी की आप का नाम कही ना आये इस सब में लेकिन आज मेरी प्यास आप बूझा दो प्लीज़.

दिलीप एक्टिंग करने लगा, “अरे नहीं भाभी यह क्या कह रही हैं आप ऐसे थोड़ी होता हैं. प्लीज़ आप आराम करो; अल्पेश को पता चल गया तो?”

जानकी ने दिलीप के लंड के ऊपर ही हाथ रख दिया अब तो. उसने लौड़े को पकड़ा और वो बोली, “अरे दिलीप किसी को कुछ पता नहीं चलेगा. अगर अल्पेश इंडिया में चूत के मजे लेता था तो वो अमेरिका में क्या नहीं करता होंगा. और तुम्हारा नाम कही भी नहीं आयेंगा यह मेरा प्रोमिस हैं.”

दिलीप के मन पे जैसे कोई बोझ हो वैसी एक्टिंग उसने की अपना मुहं बना के. जब की मन ही मन वो जानकी की चूत मारने को मिलेंगी यह सोच के बड़ा खुश था….!

भाभी की चूत मारने का तो दिलीप भी बड़ा मन हुआ था लेकिन वो अपनी एक्टिंग पे अड़ा हुआ था. उसे पता था की भाभी चूत मस्त तपी हुई हैं और थोड़े अहतियात रखने पे चूत रोज लेने को मिल सकती हैं. जानकी भाभी ने दिलीप के लंड को कस के पकड़ा हुआ था और वो उसे कह रही थी की कुछ प्रॉब्लम नहीं होंगा. “दिलीप मैंने बोला तो कुछ प्रॉब्लम नहीं होंगा. लाओं मैं तुम्हारा लौड़ा चूस के देती हूँ.”

भाभी की चूत बड़ी गर्म हो गई थी
दिलीप भी अब अपनी एक्टिंग से बाज आ गया. उसने अपने पेंट की ज़िप खोली और अपने लौड़े को बहार निकाला. भाभी की चूत मारने की बात सुन के उसका लौड़ा पहले से ही बड़ा टाईट हुआ पड़ा था और ऊपर से जानकी भाभी ने उसे अपने हाथो से दबा दिया था. लौड़ा जैसे बहार आया जानकी ने अपने होंठ उसके ऊपर रख दिए. लौड़े की हाईट कुछ साढे छ इंच जितनी थी और उसकी चौड़ाई कम से कम ढाई इंच जितनी थी. जानकी भाभी का मुहं अब लंड के ऊपर सही गति से चलने लगा था जैसे, उन्होंने लौड़े को अपने मुहं के अंदर तक भर लिया और वो टट्टे पकड़ के सहला रही थी. दिलीप के मन में उस वक्त क्या बीत रही थी वो तो वहीँ जानता हैं जिसने अपना लंड कभी किसी के पास चुसाया हैं. जानकी भाभी भी अपने चुंचे खोलने लगी. उसने अपनी नाईटी की डोरी को खोला और लौड़ा चूसते चूसते ही उसे निकाल फेंकी. अंदर की सफ़ेद ब्रा भी एक हुक के आधार पे टिकी थी जिसे भाभी ने लौड़े को बिना डिस्टर्ब किये निकाल फेंका. भाभी के मादक बड़े चुंचे अब कमरे की रौशनी में जैसे की चमक रहे थे. जानकी भाभी की चूत भी लौड़ा ले लेने के लिए जैसे की उतावली हुई पड़ी थी.

दिलीप ने अपने लंड को अब जानकी भाभी के मुहं से बाहर निकाल लिया. अपनी पतलून को उसने घुटनों के ऊपर से खिंच के निकाल दी. जानकी भाभी ने बड़े ही मादक तरीके से दिलीप के शर्ट के बटन के बिच के हिस्से में हाथ डाला. व दिलीप की नजरो में नजरे मिलाते हुए उसके बटन खोलने लग गई. दिलीप सोच रहा था की इतनी मादक चुदाई तो कभी कलावती ने भी नहीं दी थी. वो मन ही मन अल्पेश को कोस रहा था की ऐसी होर्नी बीवी को छोड़ के वो किसी औरत औरत के पीछे पागल था. जानकी भाभी ने दिलीप को बिलकुल नंगा कर दिया और वो भी अपने शरीर के ऊपर के बचे कुचे कपड़ो से आजाद हो गई. दिलीप ने अपने मुहं को भाभी के चुंचे के ऊपर रख दिया और वो चुंचो को मस्त चूसने लग गया. आह आह की आवाज करते हुए जानकी भाभी थोडा पीछे हटी; लेकीन दिलीप ने उसे और झटका दे के दीवाल के साथ ही लगा दिया. दिलीप ने भाभी की गांड को दीवाल से सटा दिया और वो चुंचो को मस्ती से चूसने लगा. जानकी भाभी की चूत अब पानी छोड़ चुकी थी और उसे अब लंड ले ही लेना था. लेकिन दिलीप भाभी को पहले अपनी ऊँगली से चोदना चाहता था.

ऊँगली और फिर लंड से चुदाई
दिलीप ने कुछ 2 मिनिट और भाभी के चुंचे चुसे और फिर वो निचे बैठ गया. जानकी भाभी के एक पाँव को उसने उठा के अपने कंधे के ऊपर रख दिया. इस तरह भाभी की चूत निचे से मस्त खुल गई. दिलीप ने अब अपनी एक ऊँगली को थूंक से भिगोया और उसे चूत के अंदर रगड़ने लगा. भाभी अतिसुख से कराह रही थी. दिलीप ने पहले ऊँगली को चूत के होंठो के ऊपर मस्त फेरा और फिर धीरे से चूत के अंदर डाल दिया. बहुत महीनो से प्यासी चूत को जैसे की एक आनंद का रास्ता मिल गया. जानकी भाभी की आँखे बंध हो गई और उसके मुहं से एक जोरदार सिसकी निकल पड़ी.

दिलीप की ऊँगली चूत के अंदर बहार होने लगी जैसे की वो एक छोटे लंड से भाभी की चुदाई कर रहा हो. भाभी के मुहं से सिसकियाँ निकलती ही जा रही थी. उसने अपने हाथो से दिलीप के बाल पकड़ के नोंच डाले और अब वो दिलीप को अपनी चूत मारने के लिए विनंती करने लगी. अब दिलीप को लगा की भाभी की चूत सही गरम हुई हैं और अब उसे मारा जा सकता हैं.

दिलीप उठा और उसने भाभी का हाथ पकड़ के उसे बिस्तर की तरफ खिंचा. जानकी भाभी की चूत पानी छोड़ चुकी थी ऊँगली की चुदाई से ही और अब दिलीप भाभी की चूत में लंड देने के लिए तैयार हो गया. जानकी भाभी ने बिस्तर में लेट के अपनी टांगो को फैला दिया और दिलीप उन टांगो के बिच पे अपना लंड ले के आ खड़ा हुआ. भाभी ने दिलीप के लंड को अपने हाथो के पकड़ के चूत के छेद के ऊपर सेट कर दिया. दिलीप के एक हल्के झटके में ही चूत के अंदर लौड़ा घुस गया. जानकी भाभी पहले से काफी गरम थी और लंड चूत के अंदर आते ही उसकी गांड का नाच चालू हो गया. वो अपनी सेक्सी गांड को आगे पीछे कर के लौड़े के मजे अपनी चूत में और भी जोर जोर से लेने लगी. दिलीप को भी भाभी की चूत में अलग ही मजे आ रहे थे जैसे की. गरम गरम चूत के अंदर वो भी अपना लौड़ा हिला हिला के मस्त ठुकाई कर रहा था.

20 मिनिट की चुदाई के बाद जब दिलीप के लंड का पानी भाभी की चूत में निकाला तो दोनों को जैसे एक असीम आनंद मिला. दिलीप वही ढेर हो गया भाभी के चुंचो के ऊपर. जानकी भाभी ने उसे कस के जकड़ लिया अपनी बाहों में. उसकी चूत भी आज बहुत दिन के बाद तृप्त हुई थी. यह तो चुदाई की शरुआत ही थी जैसे. इस दिन के बाद तो जानकी भाभी दिलीप की रखेल ही बन के रह गई हैं. जब चाहें तो आ के भाभी की बूर और गांड में लंड दे के जाता हैं….!

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