नमस्कार मेरा नाम स्मिता हे, में ४८ साल की हु और एक स्कूल में टीचर का जॉब करती हु. मेरा डाइवोर्स हो चूका हे. कुछ पर्सनल प्रॉब्लम की वजह से लेकिन अभी में अकेली रहती हु, और मुझे चुदवाने का बहुत सोख हे, में हमेशा से ही बड़ी चुदक्कड़ औरत रही हु, आज में आप सभी मेरी चीफ गेस्ट के साथ की चुदाई कहानी सुना ने जा रही हु.
मेरा फिगर ३६-४०-४२ हे, हमारी स्कूल में पिछले महीने एन्युअल डे था उसमे लखन जी को चीफ गेस्ट के तौर पर बुलाया था. वो एक ३७ साल का आदमी हैं दिखने में एकदम हेंडसम लगता था. जब मेने उन्हें पहली बार देखा तभी से मुझे कुछ कुछ होने लगा था जब में उनके स्वागत के लिए तिलक लगाने गई. तभी उन्होंने भी मुझे निचे से ऊपर तक देख लिया. जब मेने उन्हें तिलक लगाया तभी उन्होंने हलके से मेरे हाथो को टच किया, हाय… क्या कहू… मुझे कितना अच्छा लगा था, अब मेने तो पक्का ठान लिया था केसे भी करके इनसे जरुर चुदवाउंगी.
उसके बाद फंक्सन चालू हुआ, और वो बार बार मुझे ही घुर रहे थे. और में उनको. थोड़ी देर बाद में फंक्सन से उठ के बहार जाने लगी और वो कुछ रीज़न दे के मेरे पीछे पीछे आने लगे थे. अब मुझे भी थोडा डर लग रहा था. क्युकी अगर किसीने देख लिया तो शक हो जाएगा. इसी लिए में स्टाफ रूम में जाने लगी, अब वो भी मेरे पीछे पीछे आये और मुझसे पूछा यहाँ टॉयलेट कहा हे., मुझे थोड़ी शर्म आई लेकिन मेने उन्हें कहा टॉयलेट तो स्कूल की दूसरी साइड में हे.
फिर वो मेरे बहोत करीब आए और कहने लगे.
लखनसिंग: तुम्हारा नाम क्या हे?
में: जी में स्मिता.
लखन: तुम ये साडी में बहोत खुबसूरत लग रही हो.
में: जी थैंक्स.
अब हम दोनों एक दुसरे की आँखों में आँखे डाल के देख रहे थे.
में: जी आपको टॉयलेट जाना था.
लखन: हां.. आप बहोत खुबसूरत हो आपसे नजर ही नहीं हटती अम्म..
में: जी.. आप ये क्या कह रहे हे कोई आ जाएगा ना.
लेकिन अब तो में भी यही चाहती थी की वो मुझे कसके दबाये, और अहह…लेकिन तभी उनका फोन बजा फोन शायद हमारे प्रिंसिपल का था उन्होंने उन्हें जल्दी वापस आने को कहा था. फिर उन्होंने फोन रख्खा और कहने लगे.
लखन: में चलता हु. तुम फंक्सन ख़तम होने के बाद मुझे मिलना तुमसे काम हे थोडा.
और वो जाने लगे तभी फिर पीछे आये और मुझे एक बार बाहों में लिया,.. में तो शॉक हो गई थी फिर फटक से वो अलग हो गए और चले गए, में तो बस अह्ह्ह… उस एहसास के बारे में सोच रही थी.
उसके बाद शाम को ९ बजे फंक्सन ख़तम हुआ.. और सब जाने लगे में भी निकल के बस स्टॉप पे पहोची तभी उनकी कार उस स्टॉप पे आई और उन्होंने मुझे कार में बेठ ने के लिया बोला. और में इधर उधर देख कर बेठ गई, और फिर वो ड्राइव करने लगे फिर धीरे से उन्होंने एक हाथ से मेरे हाथ को पकड़ा और वो मेरे घर के बारे में पूछने लगे. अब मुझे उनका हाथ पकड़ के अच्छा लग रहा था, अब वो धीरे धीरे मेरे हाथ को सहला रहे थे.
फिर थोड़ी देर बाद मेरा घर आया और हम दोनों कार से उतर गए फिर मेने उन्हें कहा.
में: आइये घर पे चाय पी के जाना.
लखन: ठीक हे चलो.
फिर वो कार पार्क करके हम दोनों अन्दर आ गए फिर उन्हें सोफे पर बिठाया और पानी ला के दिया और उनसे कहा.
में: आप बेठिये में जरा चेंज करके आती हु.
और में उनको हलकी सी स्माइल दे कर अन्दर बेडरूम में चली गई. और जान बुज कर दरवाज़ा थोडा खुला छोड़ दिया था. फिर मेने अपनी साडी उतारी और फिर ब्लाउज उतार दिया अब में सिर्फ ब्रा और पेटीकोट में थी. तभी उन्होंने पीछे से आकर मुझे गले लगाया, अह्ह्ह्हह……. वो सिर्फ पेंट पहने हुआ था ऊपर से पुरे नंगे थे.. अह्ह्ह… कितना मजा आ रहा था, लेकिन फिर भी मेने उन्हें पूछा..
में: आह्ह्हह्… लखन जी ये आप क्या कर रहे हो आआह्ह्ह…
लखन: अह्ह्ह… एक खुबसूरत औरत को प्यार कर रहा हु, उम्म्म्ममा…मुहाआआअ….
अब में भी ढीलीपड़द गई थी, फिर उन्होंने मुझे सीधा किया अब मेरे बूब्स उनके छाती पे धंस गए थे और उन्होंने मेरा फेस ऊपर करके मेरी आँखों में देखने लगे फिर धीरे धीरे अपने हाथ मेरे होटो से लगाये आह्ह्हह्ह..उम्म्माआआ ..मुहाआआअ…….अह्ह्ह्हह्ह……कुछ १५-२० मिनट तक हम किस कर रहे थे, तब तक उन्होंने मेरी ब्रा और पेटीकोट भी खोल दिया था… अह्ह्ह..
लखन: अह्ह्ह….स्मिताजी आप कितनी स्वीट हो,आआआह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्
और उन्होंने अपनी पेंट निकाल कर फेक दी फिर उन्होंने मुझे दिवार पर लगाया और चूमने लगे थे मेरे पुरे बदन पर अह्ह्ह्ह…. मुजे बहुत मज़ा आ रहा था अब में भी उन्हें सहला रही थी, आआह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्अब में अपना हाथ आगे कर कर अंडरवियर के ऊपर से ही उनका लंड सहलाने लगी थी, अह्ह्ह….अह्ह्ह…कितना कड़क लंड था उनका..अह्ह्ह.
फिर उन्होंने मुझे उठाया और बेड पर सुला दिया, और अपनी अंडरवियर भी निकाल दी. और मेरे ऊपर आकर मेरे बूब्स को चूमने लगे, आःह्ह्ह…चाटने लगे थे.. मेरा दूध पिने लगे थे, अह्ह्ह…क्या बताऊ कितने प्यार से चूम रहे थे. अह्ह्ह….फिर धीरे धीरे पेट पर चूमने लगे थे आः… में उनके बालो को सहला रही थी..और उन्होंने आगे बढ़कर मेरी पेंटी उतार दी और मेरी चूत के इर्द गिर्द चूसने लगे थे.
में: अह्ह्ह….लखन जी आप ये क्या कर रहे हो, आआआअआयाह्ह्ह्हह्हह्ह्ह….कितना अच्छा लग रहा हे अह्ह्ह्ह…..उम्म्म्म….अह्ह्ह.
अब मुझसे भी रहा नहीं जाता था, में अपनी गांड उठा उठा के उन्हें साथ दे रही थी,अह्ह्ह…और वो भी अपनी जुबान से मेरी चुदाई कर रहे थे… अह्ह्ह….कितना मजा आ रहा था आअह्ह्ह्ह
फिर कुछ देर बाद में झड़ गई थी अह्ह्ह…! और उन्होंने मेरा सारा रस पी लिया था आआअह्ह्ह्ह, फिर वो मेरे ऊपर आकर मुझे चूमने लगे थे, औऊआआअ… फिर मेने उन्हें निचे लिटाया और उन्हें चूमने लगी थी, में उन्हें पागलो की तरह चूम रही थी, आह्ह्हह्ह..उम्म्म..आ…और फिर निचे उनके लंड को सहलाने लगी आआह्ह्ह्ह.. फिर उनका ६’ लंड मुह में भर लिया, अह्ह्ह्ह,, उम्म्म अह्ह्ह अह्ह्ह उम्म्म, और उसे चूसने लगी थी लोलीपॉप की तरह अह्ह्ह और उनके अन्डो को भी चाटने लगी थी.. अह आआह्ह्ह.. क्या एहसास था उस फुले हुए लंड को चूसने का आःह्ह्ह.
लखन: अह्ह्ह्ह, स्मिता जी आःह्ह… आप तो कमाल की हे, क्या चुस्ती हो अह्ह्ह्हह्हह्ह्ह ,और जोर से….आआह्ह्ह खा जाओ मेरा लंड अह्ह्ह्ह… अह्ह्ह्ह… सक ईट माय बेबी, सक हार्डर, आह्ह्ह्ह.
फिर उनका लंड चूस चूस कर मेरा मुह दुखने लगा था आह्ह्हह्ह चोदो ना जल्दी आह… घुसाओ अपना लंड आह्ह्ह…मेरी चूत के अंदर जल्दी से लखन जी.
लखन: अह्ह्ह… इतनी भी क्या जल्दी हैं मेरी रानी, चुसो ना इसे गले तक ले के.
में: अह्ह्ह्ह, आप भी ना लखन जी घुसाओ ना मेरी प्यारी सी चूत में अपना लंड आआआआआअह्ह्ह्हह्ह्ह्हह. अब मुझ से रहा नहीं जा रहा हैं.
लखन: ये हुई ना बात आःह्ह्ह… ये लो
और उन्होंने एक ही झटके में अपना आधा लंड मेरी चूत में डाल दिया आआअआआआहह्ह्ह्हह्ह, और जोर जोर से चोदने लगे थे, क्या मजा आ रहा था बता नहीं सकती. में अपनी आँखे बंद की हुई और उनके धक्के जेल रही थी… अहह, एक पे एक मस्त शॉट मारते जा रहे थे.. आह.
में: अह्ह्ह…लखन जी चोदो और जोर से चोदो आह्ह्ह… बहुत दिनों से प्यासी हूँ में आह्ह्ह और जोर से शॉट मारो, आह्ह्ह…आःह्ह्ह… फाड़ दो मेरी प्यासी चूत को अपने लंड से अह्ह्ह्हह्ह मुझे बहुत मस्त लग रहा हैं लखन जी चोदो मुझे और जोर जोर से प्लीज़ज्ज्ज्जज…!
लखन अब मुझे ऐसे चोदने लगा की जैसे चूत का खड्डा पूरा खोद के उसमे से पानी निकालना हो, वो पूरा लंड गहराई तक डाल के एक झटके में उसे निकाल देता था. उसका लंड ऐसे रगड़ रहा था चूत तो और मैं जैसे पंख लगा के हवा में उड़ रही थी. लखन के बदन पर और मस्तक पर पसीना छुट चूका था लेकिन वो मुझे ऐसे पेल रहा था जैसे की 19 साल का जवान लड़का हो वो..!
कुछ २५ मिनट बाद वो झड़ गए तब तक में २ बार और झड चुकी थी. बहोत हल्का महसूस कर रही थी में अह्ह्ह.. फिर हम थोड़ी देर एक दुसरे के ऊपर सो गये कुछ देर बाद हम उठ गए और घडी में देखा ११ बज रहे थे फिर मेने उन्हें कहा आज रात यही रुक जाओ ना. वो भी तैयार हो गए फिर उन्होंने अपनी बीवी को फोन कर के बोल दिया वो अपने दोस्त के घर पे हे. और कल सुबहे आयेंगे और फिर मुझे बाहो मे लेके चूमने लगे थे. आःह्ह्ह उन दो दिनों में हम दोनों ने १०-१२ बार चुदाई की थी और उन्होंने मेरी गांड भी मारी थी पुरे घर में चुदाई की उन्होंने मेरी आह्ह्हह्ह, फिर वो चले गए वापस आने का वादा दे कर.
लेकिन अब तो मेरी चूत में ज्यादा ही खुजली होती रहती हे जब से उन से चुदवाया हे.
