रविवार की अलसाई सी सुबह थी वह उठी ,पिछ्ली रात का हैंगोअवर अभी भी तारीं था l पिछ्ली रत वह अपने कालेज के दोस्तों के साथ बाहर गई थी और उसने भी काफ़ी पी ली थी ,कारण ही कुछ ऐसा था l
उन पलों को याद करना कितना पीड़ादायक था कि उसका प्रेमी उसके सन्मुख ही अपनी नई गर्ल फ़्रेण्ड के साथ अभिसार मे लिप्त था,कुछ्माह पूर्व उसका उससे सम्बंध -विच्छेद हुआ था, यद्यपि इसका दोषी वह उसे नहीं मानती ,उसे मालूम है कि वह कितना अधिक असहनीय और उन्मादी प्रेमिका थी l
अपने प्रेमी द्वरा उस लड़की को चूमने को याद करके उसे उन्माद सा चढ़ने लगा था ,अब गर्मी उसकी जाँघों से बढ़ती हुई मससूस हो रही थी,उसने अपनी आँखें बन्द कर ली और अपनी इस कामुक कल्पना को परवान चढ़ने के लिए उसमें कल्पना की आहुति दे दी l
उसने पिछ्ले छ्ह माह से समागम नहीं किया था और इन छ महीनों में वह विकट अवसाद से गुजर रही थी जबसे प्रेमी ने छोड़ दिया थाl
अभी भी वह उन्ही वस्त्रो में थी जो कल रात उसने पहने थे कल रात जब वह वापस आई तब वह इतनी पी रखी थी और इतनी बुरी तरह से बो झील थी की सीधे बिस्तर पर जाकर सो गयी थी कपडे बदलने का ख्याल तो छोड़िये होश भी न था
अब उसके पेटसे होते हुए जांघो की और जा रहे थे और पोशाक के अंतिम सिरे पर पहुच कर ठहर गए ,अब उसने गाढे रंग के वस्त्र को ऊपर खींच कर भाग प्रदेश को पंटी के ऊपर से हलके से थपथपाया और उसे किनारे से हटा कर अपनी एक उंगली उस रस से सराबोर छिदर में धीरे से घुसा दी
उसके जघन प्रदेश इस समय बालों से
पूर्णतया अच्छादित था l समान्यतया वह अच्छी तरह से इस भाग को साफ़ रखती थी विशेष रूप से शनिवार
को जब वह बाहर जाती है क्योंकि इधर उसने इस और ध्यान देना ही छोड़ दिया वसे भी पिचली रात को उसे कोइ उम्मीद नहीं थी l अतः उसने इस की सफाई में कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई
अब वह् अपनी तर्जनी को अपने भगाँकुर पर ले आई और अपने योनिरस से उसे
भीगो कर धीरे धीरे वर्तुलाकार घुमाने लगी और यह मह्सूस करते हुए कि उसकी योनि में रस की बाढ़ आरही है उसके
मुँह से कामुक कराह निकाल गई उसे याद नही पड़ता कि वह् कब इतना कमोन्मादित हुई थी l यौन रस प्रवाहित करना
आरम्भ कर दिया था l और जिसके चलते उसका हाथ उसके रस से चिपचिपा हो रहा था l
चिपचिपी उँगलियाँ नीचे से निकाल ली और अपने चेहरे के करीब ले आई जो ही तीखी और गन्दी से महक लबरेज थीं l
रात भर के पीने ,नाचने मूतने व पसीने से तर योनि पूरी तरह से चौपट थी l उस महक से वह स्वयं को और भी अधिक
गन्दा और कमोन्मादित महसूस कर रही थी अपनी बुरी तरह से महकने वाली योनिरस से गीली नमकीन उँगलियों को
चाट कर साफ़ किया l चूत काम्ररस का स्राव कर रही थी और वह परमानंद के के कारण इतनी उत्तेजित हो गई थी कि
उसकी फ़िर से चीख न निकल जाए I
अब उसने सोचा कि रजाई के अन्दर हस्तमैथुन से बेकार ही रजाई बर्बाद हो जाएगी अतःउसने तय किया कि हस्तमैथुन करते समय रजाई के बाहर रहना अच्छा होगा उसने रजाई की एक ओर कर के बेड पर बैठे – बैठे अपनी टाँगो को फ़ैलाया और फ़िर से अपने भगाँकुर को कुरेदना चालू किया l
जैसे ही वह गति बढाते हुए उत्तेजना के चरम शिखर की ओर अग्रसर हो रही थी अकस्मात उसने अपने कमरे के किवाड़ खुलने की चरमराहट सुनी ……..
उसका कजिन किवाड़ से झाँक कर देख रहा था और उसे देख कर वापस जाने लगाl
वह जल्दी से उठी और दरवाजा बन्द कर लिया और बिस्तर पर बैठ गई ,वह दुबारा हस्त मैथुन शुरू न कर पाने से गुस्से से भरी हुई अत्यन्त दुखी और हताश थी अब उसे भी सिगरेट की तलब महसूस हुई l
उसका कजिन उससे पाँच वर्ष बड़ा था जो प्रायः उसके बड़े भाई के साथ घूमता रह्ता था और प्रायःलड़्कों की पार्टी के बाद उसके बगल वाले उसके भाई के ही कमरे में सो जाया करता था l
उसका कजिन गाँव मे रहता था और प्रातः जलदी उठ जाता था,उसने उसे कभी भी आकर्षक नहीं पाया वह दुबला पतला छरहरे बदन का शान्त सा अन्तर्मुखी सा लड़का था l
उसने अपने बैग से मार्लबरो ब्रांड की सिगरेट और लाइटर निकाला और धीरे से दरवाजा खोला कि कोई आवाज न होने पाये कि उसके माता पित्ता जाग जाएँ, व्ह धीरे से अपने भाई के कमरे में घुस गई l
उसने देखा कि उसका कजिन उसके भाई के बेड के पास ही बीन बैग पर बैठा है,और उसका भाई गहरी नींद मे सो रहा है और उसे पता था कि वह अभी जल्दी उठने वाला नहीं है वह उठ खडी हुई और दहलीज पर पहुँच कर उसे इशारा किया l
उसने उसे सिगरट दिखाते हुए फ़ुसफ़ुसा कर पूछा ,”तुम कब से पीते हो ?”
उसने कहा कि उसे बस एक चाहिए थी वह ऐसा दिखावा कर रहा था कि उसने इससे पहले कुछ नहीं देखा l
फ़िर उसने पूछा कि वह उसके साथ शेयर करना चाहेगा l
उसने जवाब दिया “जरूर l ”
“रुको , यहाँ नहीं ” वह उसके और करीब आ गई जिससे वह उससे और धीरे से बात कर सके
” मुझे अपने भाई की तरह सिगरेट पीने की इजाजत नहीं है l ”
“चलो ! सीढियों से नीचे के बाथरूम में चलते हैं ”
वे दोनो छिप कर सीढियों से नीचे उतर गएऔर बाथरूम में घुस गए l
उसने उसे सिगरेट दे दी और बाथरूम की खिड़्की खोलने लगी ,उसने कश खींच कर सिगरेट उसकी ओर बढा दी अब वह कश ले कर धुँआ खिड़्की के बाहर छोड़ने लगी l
उन्होने चुचाप सिगरेट पी ,अब उनकी तन्द्रा भंग हुई उसने महसूस किया कि उसके कजिन का बदन खिड़की पर झुकने के कारण उसके शरीर से छू रहा है l
उससे निकटता नें उसकी कामुकता को बढ़ाकर उसे पुनः कामरस से अभिसिंचित करना आरम्भ कर दिया था क्योंकि उसने उसे हस्तमैथुन करते हुए देख लिया था l
अन्त मे उसने उसे सिगरेट पकड़ाते हुए कहा ,” मुझे पेशाब आई है l”
“ठीक है” उसने हमेशा की तरह निरपेक्ष भाव से कहा l
वह अन्दर गई और इधर उधर देखा ,उसकी आँखों मे झाँकते हुए हलके से पर शरारतपूर्ण तरीके से मुसका दी l
फ़िर उसने अपने कपड़ो को ऊपर किया और फ़िर अपनी पैंटी को नीचे खिसका कर सीट पर बैठ गई l
अब उसकी नजरे उसकी चूत पर चिपक कर रह गईं थी वह जानती थी कि उसके नरम नरम झाँटों से आच्छादित भग प्रदेश को देखकर उसे आश्चर्य अवश्य होगा l
अंततः उसकी उदासीनता या निरपेक्षता को तोड़कर वह स्वयं को गौरवान्वित महसूस कर रही थी l
उसने उसे सतातेहुए पूछा “तुमने जो पहले देखा ,क्या तुम्हे पसन्द है” जब उसकी चूत से निकल कर पेशाब की धार ,छ्नछ्नाती हुई गिर रही थी l
जवाब देने की चिन्ता किए बगैर , उसने आखिरी कश ले कर सिगरेट खिड़्की से बाहर फ़ेंक दी l और उसकी मन्शा को जानते हुए खिड़्की की ओर
जाकर उसकी टाँगो के बीच सीधे देखने की कोशिश करने लगा l
उसने मह्सूस किया कि उसके ऐसा करने से उसका दिल सीने मे तेजी से धड़्क रहा था और उसका मन में मानों बारिश की फ़ुहारे उसे भिगोए जा रहीं थी l
सब कुछ जानते हुए भी उसका मन डाँवाडोल हो रहा था और उसने सब जानते हुए असने अपने होठों को चबाते हुए अपनी टाँगो को उसके लिए और अधिक खोल दिया l
अपनी चूत से पेशाब की आखिरी बूँद के गिरने तक उसने इन्तजार किया और फ़िर अपना एक हाथ नीचे ले जाकर अपनी चूत से खेलना आरम्भ किया
और अर्द्ध निमीलित नेत्रों से उसकी ओर देखा अब वह उसके निकट आया और धीरे से उसे कन्धों से उठाकर उसे उसके पैरो पर खड़ा कर दिया l
उसकी पैंटी एड़ियों से नीचे गिर चुकी थी वह उसके सामने झुका और
,पैंटी को उसके पैर से निकाला और उसकी एक टांग उठाई औरपने कंधे पर रख लिया तत्पश्चात उसने अपना
मुँह उसकी टांगो के मध्य,उसकी झाँटदार चूत में धँसा दिया और उसकी चूत को खाने लगा l
यद्यपि उसने अपने योनाँगो की गन्दगी से शरमा कर उसने उसे रोकने का प्रयास किया ,पर तब तक
उसने उसकी जीभ को अपने भगोष्टों को अलग कर अपनी रसीली चूत के भीतर जाता हुआ मह्सूस किया
जो उसकी चूत के भीतर वर्तुलाकर तूफ़ान उठा रही थी अब उसने थोड़ा बाहर निकाल कर उसके भग्नासे
पर गोल गोल घुमाना आरम्भ कियाजेना ने उसके सिर को बालों से पकडकर उसका मुँह अपनी ओर जोर
से खीँचा और अपनी जाँघोंके बीच दबा कर उसकी साँस ही रोक दी l अब वह अपनी जीभ को और भी वहशियाना तरीके से चलाने लगा l
अब उसने चूत पथ का स्राव क्षारीय निकल कर अपने मुँह मे आता हुआ महसूस किया उत्तेजना के कारण गर्भाशय ग्रीवा
से कफ जैसा दूधिया व गाढ़ा स्राव भी निकल कर उसके योनि मुख से उसके मुँह मे आ रहा था lयौन उत्तेजना
के कारण उसके भीतर व गुदाद्वार के पास की पेशियां भी सिकुड़ कर फ़ैल रही थीं ये रुक-रुक कर फैलती-सिकुड़ती
जा रहीं थी और इस संकुचन से उसे असीम को असीम आनंद मिल रहा था l
तभी उसने महसूस किया कि उसकी योनि व गुदा से उठने वाली लहरें अपने पेट की ओर जाती महसूस कर रही थी ,उसे पसीना आ रहा था l
जल्दी ही जेना चर्मोत्कर्ष के समीप पहुँच गई और अपनी चर्मोतकर्ष जनित कराह और सिसकियों को रोकने का भरपूर प्रयास किया जिससे कोई जाग न जाए ,ऐसा करने मे उसने उसका सिर तब तक कस कर पकडे रखा जब तक उसकी धड़कने कम न हो गईं और फ़िर अपनी टागो के मध्य उसके सिर को देखा
डैनी ने ने उसकी जाँघों के मध्य से अपना सिर निकाला और खड़ा हो गया l
इस संकुचन से उसे असीम को असीम आनंद मिल रहा था
उसने अपनी कजिन को कुछ देर के लिए अपनी बाहों मे जकड़ लिया फ़िर उसके हाथ उसके उरोजों पर पहुँच गाए और उअने उनका मर्दन आरम्भ कर दिया फिर उअसने उसकी कंचुकी हटाई और बाकी वस्त्र हटा कर चूचुको का मर्दन करने लगा जेना चर्मोत्कर्ष के बाद और अधिक संवेदनशील हो गई थी l और उसके स्पर्श-मात्र से उसे झुरझुरी (कंपन) हो रही थी जिसके कारण वह उसे और अधिक कुच मर्दन से रोक रही थी l
झड़ जाने के बाद ,उसकी कमोत्तेजना कम हुई थी फिर भी वह उसके लिए कुछ्र करना चाह रही थी जिसने उसकी इतनी गन्दी(दयनीय) चूत को चाट कर उसे शान्त कर दिया था l
वह उसके आलिगन से निकल कर खिड़्की की चौखट पर झुक कर खड़े हो कर बाहर देखने लगी गई और उसे आमन्त्रित करने के लिए अपने वस्त्र खिसका कर अपने नितम्ब दिखाने का प्रयास किया l
उसकी चूत उसके काम रस पेशाब तथा उसकी लार से गीली होकर चमक बिखेर रही थी गाढ़ा श्वेत द्रव उसके भगोष्ठों से बह कर उसकी झाटों के मध्य विलीन हो रहा था l
अब उससे रहा नहीं गया और फ़िर उसने अपना लन्ड उसकी रस- सिक्त भगोष्ठों के बीच रख दिया l
अब जेना ने उसके लिंगमुण्ड को अपनी योनिमुख मेंप्रविष्ट होता महसूस किया उसके पीछे से चोदना शुरू करते ही जेन नें खिड़की की दलीज को जोर से पकड़ लिया उसके वृषण उसके चूतड़ो व जाँघों पर प्रहार कर रहे थे l
अब उसने उसे कटि-प्रदेश से पकड़ कर और अधिक तेजी से धक्के मारने लगा पूरा लन्ड निकाल कर इतनी रेजी से वह धक्का मार रहा था कि उसके नितम्ब हिल जा रहे थे l
अब जेना को हर धक्के के साथ दर्द और आनंद का मिश्रित अहसास हो रहा था l
अब उसने चोदने मे एकसार तेज गति पकड़ ली और तेज -तेज धक्के मार कर उसकी चूत मे विस्फ़ोट के समान उसकी चूत में झड़ गयाl
