जीजू और दीदी के कमरे में से आज भी वही आह आह की आवाज आ रही थी और चारपाई भी टुक टुक कर रही थी. मैं वही खिड़की के सामने खड़ी हो गई और वही छेद से अंदर का नजारा देखने लगी. मेरी दीदी शिल्पा की शादी को ३ साल हुए हैं और मेरी जीजू वैभव दिल्ली के हैं. दीदी अपने पी.एचडी के लिए अभी ससुराल नहीं जा रही हैं और जीजू हर हफ्ते एक बार यहाँ आके उसकी चूत बजा जाते हैं. जीजू बहुत ही हेंडसम हैं और उनका बदन भी बड़ा कातिलाना हैं. मैं भी अब १८ की हो गई हूँ और मेरे बदन में भी अब बदलाव आये हैं. मेरी चूत भी पसीना लेती हैं और मेरी निपल्स भी किसी के अकस्माती टच से कड़े हो जाते हैं. एक साल पहले से ही मैं जीजू के तरफ आकर्षित हुई हूँ. लेकिन मैं जीजू को कुछ कहने की हिम्मत नहीं कर पा रही हूँ. जीजू दुसरे जीजा लोगों की तरह मेरे जीजा मजाक नहि करते हैं, और कभी मुझे लगा ही नहीं की वो मेरी जवानी में इंटरेस्टेड हो. इसलिए वो जब भी यहाँ आते हैं मैं चुपके से उन दोनों की चुदाई देख के अपनी चूत में ऊँगली करती हूँ.
अंदर दीदी की चूत में जीजा का लंड था और दीदी उसके ऊपर उछल रही थी. दीदी के उछलने से चारपाई टुक टुक का आवाज कर रही थी. दीदी के बूब्स हवा में उड़ रहे थे और बिच बिच में जीजा उसे दबा के दीदी को और भी सम्मोहित कर रहे थे. चारपाई के ऊपर सोये जीजा का लंड चूत में अंदर बहार होते देख मैंने अब अपनी चूत पर ऊँगली रखी और उसे दबाने लगी. मेरी चूत ने आज महीने में चौथी बार पानी छोड़ा था और वो पूरी गीली हो चुकी थी. पेंटी के आगे का भाग जैसे भीग सा गया था और उसके ऊपर ऊँगली दबाने से बहुत ही मजा आ रहा था. मैं इतना ओतप्रोत थी दीदी और जीजू की चुदाई का कार्यक्रम देखने में की निचे से आ रहे रामुकाका की क़दमों की आवाज मुझे सुनाई ही नहीं दी. और जब वो एकदम करीब आया तो मैंने मूड के देखा. उसे देखते ही मेरे होश उड़ गए. मैं नहीं चाहती थी की जीजा और दीदी को पता चले की मैं उन्हें देख रही थी. इसलिए मैंने फट से अपनी ऊँगली को होंठो पर रख के रामुकाका को चुप रहने का इशारा किया. रामुकाका के हाथ कांप गए और उन्होंने अपने कदम को भी रोक लिया.
रामुकाका समझ गये की मैं दीदी के रूम में झाँक रही थी. उन्होंने मुझे कंधे से पकड़ा और हटा दिया. और वो खुद अब अपनी आँख को छेद पर लगा के अंदर जीजू और दीदी की चुदाई का नजारा देखने लगे. चारपाई की आवाज अभी भी वैसे ही आ रही थी, दीदी की चुदाई जोरों पर ही थी.
रामुकाका जब पीछे मुड़े तो उनकी आँखों में चमक थी. बिटिया बिटिया कहते मुझे थकते नहीं थे और अब उनकी आँखे वही बिटिया के बदन को ऊपर से निचे देख रही थी. कभी वो मेरी छाती के ऊपर देखते तो ज्यादातर उनकी नजरें मेरी चूत वाले भाग पर स्थिर हो जाती थी. उन्होंने मुझे इशारा किया और कहा की मैं बगलवाले कमरे में आऊं. वो कमरा हम स्टोर रूम के तौर पर यूज़ करते हैं और रामुकाका भी वही कुछ लेने आये थे.
अंदर घुसते ही रामुकाका के चरित्र में छुपे हुए लंड के पिठ्ठू मर्द की आवाज आई
क्या देख रही थी तुम छेद से, तुम बड़ी जवान हो गई हो अब तो …!
मैं गला साफ़ कर के बोली, नहीं मुझे कुछ काम था इसलिए मैं वहाँ आई थी रामुकाका.
लेकिन मेरे टूटते आवाज से किसी को भी पता चल जायेंगा की मैं जूठ बोल रही थी. रामुकाका मेरे करीब आये और धीरे से बोले, तुम्हे भी लेने का मन होता हैं क्या? कहों तो मैं चोद दूँ तुम्हे.
बाप रे वो मेरे दादा के उम्र का था. कम से कम ६० का तो होंगा ही. मेला सा कुर्ता, और निचे उस से भी मैली धोती. कंधे के उपर सफाई का कटका और बीडी पिने से काले पड़े हुए होंठ. मैं कभी सोच भी नहीं सकती थी की मैं इतनी मजबूर हो जाउंगी की रामुकाका जैसा बूढ़ा मुझे चोदने की बात कर लेंगा.
मैं कुछ नहीं बोली और रामुकाका मेरे समीप आ गया. उसका हाथ मेरे कंधे पर और फिर एक ही सेकंड में मेरी छाती पर था. वो मेरी छाती को दबाने लगा और मेरे पहले से उत्तेजित बदन को वो स्पर्श अच्छा लगा. लेकिन फिर भी मैंने विरोध किया और रामुकाका के हाथ को हटाया अपने ऊपर से.
सटटटटटटटटटाक…. की आवाज से रामुकाका ने मेरी कान के परदे को जैसे फाड़ दिया. उनके लगाए हुए तमाचे से मुझे चक्कर सा आने लगा था. मैं बेसुध्ध सी हो गई उस हार्ड तमाच से. रामुकाका ने अब मुझे कंधे से पकड़ के अपनी और खिंचा और मेरी दोनों बूब्स को पकड़ के उन्हें जोर जोर से दबाने लगे. उनके हाथ ऐसे मरोड़ रहे थे मेरी चुंचियां जैसे की उनको छाती से निकाल फेंकनी हो. मुझे बहुत दर्द हो रहा था लेकिन वो रुकने वाले थोड़ी थे. रामुकाका अब मेरी पेंट के निचे के भाग में हाथ घिसने लगे. मेरी चूत तो कब से गीली हो चुकी थी. अब मेरा दर्द जैसे कम होने लगा था और उसकी जगह मीठे मीठे दर्द ने ले ली थी. मुझे अच्छा लग रहा था जन रामुकाका का हाथ मेरी जवान चूत के ऊपर घिस रहा था. मैंने देखा की उनकी धोती भी कब से ऊँची हुई पड़ी थी और उनका लंड बहार आने को मरा जा रहा था. मैं कुछ सोचती उसके पहले तो रामुकाका ने मेरी पेंट खोल के साइड में फेंक दी.
मेरी टी-शर्ट के ऊपर से ही अब वो जोर जोर से बूब्स दबा रहे थे. मेरी निपल्स छोटी थी लेकिन उस वक्त वो जैसे उभर रही थी बहार और मुझे निपल्स के ऊपर भी हल्का हल्का मीठा मीठा दर्द हो रहा था. रामुकाका ने अपनी धोती को एक ही झटके में खिंच दी और उनका ६ इंच का लंड मेरे सामने देख रहा था. लंड के चारोऔर झांटे ही झांटे थी. शायद उन्होंने अपने लंड को ३ महीने से साफ नहीं किया था. रामुकाका ने मेरा हाथ पकड के अपने लंड को उसमे रख दिया. उनका लंड बहुत ही गर्म था. मैं बिना कुछ कहे उनके लंड को हिलाने लगी और वो सिसकियाँ भरने लगे. रामुकाका ने अब मेरे हाथ ऊपर कर के टी-शर्ट भी उतार फेंका और मैं उनके सामने नंगी खड़ी थी अब. उनकी कुतिया नजर ने मुझे ऊपर से निचे देखा और फिर उन्होंने मुझे अपने शोल्डर पर उठा के कौने की और रुख किया. वहाँ निचे एक टूटी हुई चटाई थी जिसके ऊपर डाल के वो मेरे ऊपर आ गए. वो मेरे सीने पर चढ़ बैठे और उनके लंड से गन्दी स्मेल मेरे मुहं में आने लगी.
इसे चूस जरा और इसे खड़ा कर दे.
लंड से आ रही गंध की वजह से मैं चुसना नहीं चाहती थी, तभी मुझे वो थप्पड़ याद आ गई और मैंने मुहं खोल के लंड को अंदर कर लिया. रामुकाका को तो जैसे की चन्दन की ठंडक मिल गई हो. उनकी आँखे बंध हुई और वो मेरे माथे को पकड़ के अपने लंड को धीरे धीरे से मेरे मुहं में आगे पीछे चलाने लगे. मेरा मुहं पूरा भर गया था और बिच बिच में रामुकाका अपने टट्टे भी मुझे चूसा र्हे थे. टट्टे भी बालों से भरे हुए थे और उन्हें चूसते वक्त बाल मेरे मुहं में आ रहे थे. करीब ५ मिनिट और मेरे मुहं में लंड डालने के बाद रामुकाका ने मुझे छोड़ा, उन्होंने अपने कपडे पुरे उतारे, उनका यह रूप बड़ा ही भयानक था. उनका लंड पूरा खड़ा था और आसमान की और टाईट हुआ था. झांटे उसका स्वरूप और भी रौद्र बना रही थी. रामुकाका ने अब मेरी टाँगे खोली और मेरी चिकनी चूत को देख के लाळ टपकाने लगे. उन्होंने अपना माथा मेरी चूत में रखा और उसे कुत्ते की तरह चाटने लगे. बाप रे कितना मजा आ रहा था उनके चूत को चाटने से तो. मैं बेकाबू हो रही थी जैसे.
रामुकाका ने जबान को चूत के छेद में देना चाहाँ लेकिन मेरा छेद अभी बहुत ही टाईट था. फिर भी उन्होंने मेरी गांड पकड के छेद में जबान डाल ही दी. मैं उनके बाल पकड के खींचने लगी और वो मेरी चूत में जबान को फिराने लगे. मेरे बदन के अजब सी गर्मी चढ़ गई और मेरी चूत ने पानी छोड़ दिया. रामुकाका ने अपनी जबान से पूरी चूत को चाट के साफ़ किया.
अब उन्होंने मेरी टाँगे खोल के अपने लंड को चूत पर रख दिया. उनके गंदे लंड की गर्मी मुझे बहुत ही बेताब बना रही थी. उन्होंने एक झटका दे दिया और मेरी चूत के अंदर लंड को पूरा ढकेलना चाहा. चूत का सुपाड़ा अंदर घुसते ही मेरी चीख निकल पड़ी, ऐसे लगा जैसे चूत की दिवार फट गई हो. जब मैंने निचे देखा को रामुकाका के लंड पर खून देख के मैं घबरा गई. लेकिन रामुकाका बड़े ही स्वस्थ थे. उन्होंने लंड को जरा भी नहीं हिलाया और ऐसे ही रहने दिया. फिर उन्होंने मेरे बूब्स मुहं में लिए और उसे चूसने लगे. मुझे बहुत दर्द हो रहा था लंड अंदर होने की वजह से. रामुकाका अब एक हाथ से बूब्स दबा रहे थे और दुसरे बूब को वो मुहं में चूस रहे थे. उनके 1 मिनिट ऐसा करने से अब मुझे थोड़ी सी राहत हुई और अब मुझे अच्छा लगने लगा था. तभी रामुकाका ने अपने लंड को अंदर डाला और वो उसे अंदर बहार करने लगे. मुझे ऐसा लग रहा था जैसे चूत की चमड़ी को खरोंच रहा था उनका लंड. मैं अपने होंठो को दांतों से दबा के उस दर्द को बर्दास्त करने लगी. रामुकाका ने पूरा अंदर डाल दिया और वो मेरे उपर ही लेट गए. उनके मुहं से बीडी की तीखी तीखी गंध आ रही थी.
रामुकाका ने अब अपना पूरा लंड मेरी चूत में अंदर तक दे दिया था और वो मेरे बाल पकड के मुझे चोदने लगे. उनका लंड जब अंदर जाता था मेरी आह निकल पड़ती थी. रामुकाका के लंड के झटके मेरी जांघो के पास थक थक की आवाज बना रहे थे. वो हांफने लगे थे लेकिन उनकी चुदाई करने की झडप तो बढती ही जा रही थी. मुझे भी अब बड़ा मजा आने लगा था उनके लंड से झटके खाने से. मैं भी अब अपनी गांड उठा उठा के हिलने लगी थी और रामुकाका मुझे बड़े प्यार से धक्के देते जा रहे थे. मेरी चूत से निकला हुआ खून रामुकाका के लंड पर फ़ैल चूका था और मैं अब किसी रंडी की तरह जोर जोर से लंड को चूत में घिस रही थी.
५ मिनिट ऐसी मस्त चुदाई के बाद रामुकाका के बदन में एक तीव्र झटका लगा. वो लंड को बहार निकालने के लिए अपना हाथ लंबा कर रहे थे. लेकिन मैंने उन्हें कहा, अंदर ही निकाल दो रामुकाका मैं दवाई ले लूंगी.
यह सुनके तो बुढऊ और भी खुश हुआ और और भी जोर से झटके देने लगा. उनके बदन में और एक झटका लगा और उनके लंड से गाढे रस की बुँदे मेरी चूत में भर गई. मुझे बड़ा मजा आ गया. रामुकाका ने लंड निकाला तो उसके सुपाड़े पर खून और वीर्य लगा हुआ था. मैं ढीली होक लेट गई, मेरी चूत के छेदन से मुझे भी बड़ा मजा आ गया था. रामुकाका ने अपनी धोती से लंड को साफ़ किया और गंदे भाग को अंदर की और कर के पहन लिया. वो वापस चले गए और मैंने भी खड़े हो के कपड़े पहन लिया.
दीदी के कमरे में झाँक के देखा तो जीजू अभी दीदी की गांड में लंड डाले हुए थे. तभी मैंने सोचा की रामुकाका से अगली बार यह भी करवा लूंगी….!

