उसको तो जैसे कोई फ़र्क ही नही पड़ा था नेहा को केवल टावल मे खड़ा देखकर..वो अपनी ही मस्ती मे इधर उधर देखता हुआ प्लेट ढूँढने लगा..
नेहा को पता था की वो प्लेट कहा है, वो अंदर वाले हिस्से मे आई और एक अलमारी खोलकर उसमे से प्लेट निकाल कर दे दी..
प्लेट देते हुए नेहा के हाथ केशव के हाथों से छू गये…और वो सिहर उठी…वो पहले से ही गर्म थी..मर्द का स्पर्श ऐसी अवस्था मे औरत को और उत्तेजित कर देता है..वही हाल नेहा का भी हुआ..उसकी नज़र एकदम से केशव के लंड वाले हिस्से पर चली गयी…वहाँ बिल्कुल शांति थी..वो थोड़ा और आगे आई…और केशव की आँखों मे आँखे डालकर बोली : “अभी थोड़ी देर रुक जा,मैं नाश्ता कर लू..फिर तू ये थाली भी साथ ही लेकर चले जाना, वरना ये भी पिछली बार की तरह यहीं पड़ी रहेगी…”
नेहा को अपने इतने पास देखकर केशव सकपका सा गया..उसने आज तक किसी लड़की को छुआ तक नही था…सारा दिन दुकान पर काम करते रहने की वजह से उसका कोई ऐसा दोस्त भी नही था जो उसे सेक्स के बारे मे सोचने के लिए उकसाता..यानी उसकी कोई बुरी संगत नही थी…
पर औरत का शरीर होता ही ऐसा है..समझ ना होते हुए भी सामने वाला उसके जाल मे फँस जाता है…नेहा ने जो टावल बाँधा हुआ था, वो उसके बड़े-2 मुम्मो को पूरी तरह से ढक नही पा रहा था..उसके उभरे हुए मुम्मे देखकर केशव की हालत भी खराब होने लगी…और उसके लंड मे कड़ापन आने लगा..
वो नेहा की बात मानकर वहीं ज़मीन पर बैठ गया..और नेहा नाश्ता करने लगी..
अब उसका ध्यान आलू पूरी से ज़्यादा केशव के केले पर था..जो धीरे-2 खड़ा होकर उसके पायजामे मे उभर रहा था..
भूख तेज थी, इसलिए नाश्ता जल्दी ही ख़त्म हो गया.
अब थी असली काम करने की बारी…नेहा ने पहले से ही सोच लिया था की आज जो भी हो जाए, वो मज़े लेकर ही रहेगी…गंगू के आने तक का वेट वो नही कर सकती थी..
जैसे ही केशव प्लेट लेने के लिए आगे आया..नेहा ने ज़ोर से साँस ली और उसकी छातियाँ फूल कर और बाहर निकल आई…और उसके साथ ही उसके टावल की गाँठ भी खुल गयी…और एक ही पल मे उसका टावल नीचे पड़ा था…और वो पूरी नंगी होकर केशव के सामने खड़ी थी.
केशव तो अपनी आँखे झपकाना भूल गया…उसने नारी का ये रूप तो आजतक नही देखा था…उसका मुँह खुल गया और होंठ सूख गये…
नेहा बड़ी ही अदा से मटकती हुई उसके पास आई और बोली : “ऐसे क्या देख रहा है रे …कभी लड़की नही देखी क्या..”
उसने ना मे सिर हिला दिया..
नेहा समझ गयी की उसे सेक्स के बारे मे कोई ज्ञान नही है…वैसे पता तो उसको भी नही था ज़्यादा…उसने तो सिर्फ़ एक बार ही गंगू और रज्जो की चुदाई देखी थी…पर जिस तरह भूरे ने उसकी चूत की रगदाई की थी वो उसे बहुत अच्छा लगा था…उसने सोचा की चलो आज यही करवा लेती हू इस केशव से…अगर मौका मिला तो आगे भी करवा लेगी..
वो धीरे-2 चलती हुई उसके पास पहुँची और केशव के काँपते हुए हाथ पकड़ कर अपनी छाती पर रख दिए..
अब इतना तो केशव भी जानता था की मुम्मो को कैसे हेंडल करते हैं…उनके उपर हाथ लगते ही उसकी उंगलियों ने अपनी पकड़ बना ली और उन्हे ज़ोर से दबा दिया…
”अहह ….. सस्स्स्स्स्स्स्स्स्सस्स …..उम्म्म्ममममममममम”
वही दर्दनाशक अहसास मिला नेहा को और वो किसी बेल की भाँति केशव के बदन से लिपट गयी…
बेचारा अबोध सा केशव , अपनी किस्मत पर उसे अभी तक विश्वास नही हो रहा था…ऐसी सुंदर लड़की उसके गले से लिपटी खड़ी है और वो भी पूरी नंगी…उसने उसकी गांड के उपर अपने पंजे जमाए और उसे हवा मे उठा लिया…
बिल्कुल फूल जैसा था उसका बदन…इतनी हल्की थी वो ..
नेहा तो अभी नहा कर आई थी..पर केशव सुबह से तो क्या ,शायद पिछले कई दिनों से नहाया नही था…झुग्गी मे रहने वाले लोग शायद ऐसे ही होते हैं…उसके शरीर की दुर्गंध काफ़ी ज्यादा थी, पर नेहा के सिर पर उत्तेजना का जो नशा चड़ा हुआ था उसके आगे उसे वो दुर्गंध भी खुश्बू के जैसी लग रही थी..
उसने अगले ही पल केशव के होंठों पर हमला बोल दिया…और उसे नोचने कचोटने लगी…ऐसे जैसे कोई जंगली बिल्ली अपने शिकार के साथ करती है..
केशव के लिए तो ये सब नया था…पहली बार जो था उसके साथ…पर किसी लड़की के साथ ऐसे मज़े मिलते है, ये एहसास उसे आज ही हुआ था..
नेहा के हाथ सीधा उसके लंड के उपर जा चिपके…और उसकी लंबाई नापकर वो भी हैरान रह गयी…गंगू के जितना तो नही था..पर काफ़ी लंबा था वो भी..
वो झटके से नीचे बैठी और उसने केशव का पायजामा नीचे खिसका दिया..उसका लंड एकदम से उसके सामने खड़ा होकर फुफ्कारने लगा…और बिना कुछ सोचे उसने उसे अपने मुँह के अंदर ले लिया…
केशव बेचारे ने तो आज तक मूठ भी नही मारी थी…उसके लंड के टोपे की खाल अभी तक चिपकी हुई थी…इसलिए वो पूर तरह से पीछे भी नही हो रही थी…बल्कि उसे वहाँ तकलीफ़ होने लगी..दर्द होने लगा..
नेहा को लगा की शायद वो ही कुछ ग़लत कर रही है…उसके लिए भी तो ये पहला मौका था किसी के लंड को चूसने का..उसने केशव के लंड को मुँह से निकाल दिया..उसके लंड की खाल पीछे तक नही जा पा रही थी..
पर अगर ऐसा ही रहा तो वो अपनी प्यास कैसे बुझाएगी..तभी उसे गंगू का किया हुआ एक और कारनामा याद आ गया, जब उसने रज्जो की चूत को अपने होंठों से चूसा था तो रज्जो किस तरह से मज़े ले-लेकर चीखे मार रही थी..
वो झट से चारपाई पर लेट गयी और केशव को अपनी चूत के उपर झुका लिया..वो बेचारा आँखे फाड़े उसका चेहरा देखने लगा…की करना क्या है..
नेहा : “चल,जल्दी से यहा अपने होंठ रख दे..और यहाँ चाट…”
केशव उस वक़्त ऐसी हालत मे नही था की उसे मना कर सके…उसने वैसा ही किया…और उसके मोटे-2 हलवाई वाले होंठ अपनी चूत पर लगते ही उसकी चूत पर रेंग रही चींटियाँ गायब सी होने लगी…और वो मज़े से दोहरी होकर उसके बाल पकड़ कर अपनी चूत पर रगड़ने लगी.
”आआयययययीीईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईई ………………….. सस्स्स्स्स्स्स्सि ईईईईईईईईईईईईईईई ……………… ऊऊहह”
ऐसे मज़े की तो उसने कल्पना भी नही की थी..हाथ लगाने का अलग ही असर था पर किसी के गीले होंठ ऐसा मज़ा दे सकते हैं, ये उसे आज ही पता चला..
नेहा की चूत मे उबाल सा आने लगा..उसे अंदर से महसूस होने लगा की उसे अब जीभ के बदले कुछ और ही चाहिए अपने अंदर…और उसने अपनी पूरी ताक़त लगा कर केशव को अपने उपर खींच लिया…और उसकी कमर पर अपनी टांगे लपेट कर उसके लंड को अपनी चूत के उपर रगड़ने लगी..
केशव बेचारा पहले से ही अपने लंड पर हुए हमले से कराह रहा था..उसकी आग उगलती चूत की तपन और हल्के बालों की चुभन उससे बर्दाश्त नही हुई और वो वापिस खिसक कर नीचे आ गया..
एक अनाड़ी से अपनी पहली चुदाई करवाने मे कितना नुकसान है ये अब नेहा को समझ आ रहा था…उसकी आग तो वो शांत कर ही नही सकता था..क्यो ना उपर के ही मज़े लेकर अभी के लिए शांति पहुँचा ले वो..
और उसने फिर से उसे नीचे खदेड़ दिया..और इस बार केशव को उसने नीचे लिटा दिया..और खुद उछलकर उसके उपर जा चढ़ी …
ये लगभग वही वक़्त था जब दूसरी तरफ गंगू मुम्मैत ख़ान की चुदाई करने मे लगा हुआ था..
नेहा ने केशव के शरीर पर बैठकर उपर खिसकना शुरू किया…वो जहाँ-2 से होकर उपर जाती जा रही थी, उसकी चूत से निकल रही चाशनी अपने निशान पीछे छोड़ती जा रही थी..केशव का पूरा शरीर उसकी मिठास मे नहा कर मीठा हो गया.
और जब अंत मे वो उसके मुँह तक पहुँची तो अपनी आँखो के ठीक सामने केशव को ताजमहल नाचता हुआ महसूस हुआ…इतनी सुंदर चूत और वो भी बिन चुदी , वो उसकी सुंदरता देखकर मंत्रमुग्ध सा हो गया…और अपने आप ही उसकी लपलपाती हुई जीभ निकल कर उसके इस्तकबाल के लिए निकल पड़ी..और जैसे ही उसकी रस बरसाती चूत ने उसके मुँह को छुआ, ऐसी आवाज़ आई जैसे ठन्डे पानी में गर्म लोहा रख दिया हो ….सर्र्र्र्र्र्रररई की आवाज़ के साथ नेहा ने अपनी चूत को उसके मुँह के उपर झोंक दिया..
”अहह ……उम्म्म्ममममममममममममममममममम…… एसस्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्सस्स….”
नेहा के मुँह से तेज हुंकार सी निकलने लगी…गर्म साँसे इतनी तेज़ी से वो बाहर फेंक रही थी की केशव के चेहरे तक टकरा रही थी वो…और फिर नेहा ने केशव के बाल पकड़ कर अपनी पकड़ मजबूत करी और उसके मुँह पर किसी कुशल घुड़सवार की तरहा घुड़सवारी करने लगी…आगे-पीछे घिस्से लगाते हुए वो अपनी चूत के होंठों को उसके मोटे और खुरदुरे होंठों पर रगड़ने लगी….
और फिर एक जोरदार तूफान आया नेहा के अंदर….ठीक वैसा ही जैसा अस्तबल मे आया था, उस घोड़े के लंड को पकड़कर…बल्कि उससे भी ज़्यादा भयंकर…और उसने अपने अंदर का सारा मीठा और गाड़ा रस केशव के मुँह मे भर दिया…
हलवाई होने के नाते केशव ने एक से बड़कर एक मिठाइयाँ खाई थी…पर ऐसी मिठास उसने आज तक नही चखी थी…वो लॅप-लॅप करते हुए सारी चाशनी पी गया उसकी..
नेहा भी निढाल सी होकर उसके उपर गिर पड़ी…नेहा का मांसल शरीर केशव को बहुत अच्छा लग रहा था…पर वो मन ही मन अपनी नासमझी को भी कोस रहा था, क्योंकि उसे पता था की असली काम जो होना चाहिए था वो कर नही पाया…उसका लंड क्यो इतना दर्द करने लगा…इसका कोई इलाज जल्द ही ढूँढना पड़ेगा…
नेहा उठी और उसने अपने कपड़े पहन लिए,केशव को भी उसने जाने के लिए कह दिया, वो अपने बर्तन उठा कर चलता बना…
आज के लिए तो नेहा ने अपने आप को शांत कर लिया था…पर ज़्यादा दिनों तक वो अपनी चूत की प्यास को ऐसे ही नही बुझाना चाहती थी…इसके लिए अब उसको किसी ना किसी का लंड चाहिए ही था…फिर वो अब चाहे गंगू का हो या भूरे का…
उसने सोच लिया की पहला मौका मिलते ही वो अपनी प्यास बुझवाकर ही रहेगी.
भूरे को अपनी किस्मत पर विश्वास ही नही हो रहा था…वो जानता था की इस डील मे अगर कोई ग़लती हो जाती, यानी गंगू अगर आज पुलिस के हाथो पकड़ा जाता तो नेहाल भाई ने उसकी गांड मार लेनी थी..वो आज काफ़ी खुश था..
उसने कल्लन को वो पकेट लेकर नेहाल भाई को देने के लिए भेज दिया और खुद गंगू को लेकर एक होटल मे चल दिया…आख़िर उसने आज उसके करोड़ो रूपए के पेकेट की सही सलामत डेलिवरी जो ली थी और अपनी जान बचने की खुशी भी थी भूरे को..इसलिए वो अपनी खुशी को सेलेब्रेट करना चाहता था.
गंगू को लेकर भूरे एक 4 स्टार होटल मे पहुँचा, जहा वो अक्सर मज़े लेने के लिए जाया करता था..गंगू के लिए ये पहला अवसर था किसी बड़े होटेल मे जाने का, वो घबरा भी रहा था..और अंदर ही अंदर उसे नेहा की भी चिंता सता रही थी..पर भूरे ने जब कहा की उसे आज हर तरह की मस्ती करवाएगा तो शराब की बोतलें और नंगी लड़किया उसकी आँखो के सामने नाचने लगी..
गंगू तो था ही एक नंबर का ठरकी और उपर से फ्री की अँग्रेज़ी दारू पीने का अवसर भी वो खोना नही चाहता था, वो चुपचाप उसके साथ अंदर आ गया..
पर गंगू की हालत तो वही थी ना, भिखारी वाली..भूरे उसे सीधा होटेल के अंदर बने स्पा एंड मसाज सेंटर मे लेकर गया..और वहां के मेनेज़र के हाथ मे नोट पकड़ा कर उसे धीरे से सब समझा दिया..वो मॅनेजर भी भूरे को जानता था इसलिए उसने चुपचाप वो पैसे जेब मे रखे और गंगू को अपने साथ अंदर ले गया..वैसे तो उसकी भिखारी वाली हालत देखकर वो भी अपनी नाक भो सिकोड रहा था, पर भूरे के बारे मे वो जानता था की वो अंडरवर्ल्ड का बंदा है, इसलिए उसको वो मना नही कर सकता था.
भूरे उसके लिए कुछ नये कपड़े लेने के लिए पास ही बने एक शोरूम की तरफ चल दिया..और साथ ही उसने होटल मॅनेजर को बोलकर अपने और गंगू के लिए कुछ विदेशी ”माल” का भी इंतज़ाम करने के लिए कह दिया.
गंगू तो स्पा के अंदर आते ही वहां की लड़कियों को देखकर पागल सा हो गया..इतनी सुंदर-2 लड़किया थी वहां ..ज़्यादातर चींकी टाइप की थी और कुछ मोटी छातियों वाली नॉर्थ साइड की भी..
ग्राहक को देखकर मुस्कुराना उनकी ड्यूटी थी…पर ऐसे भिखारी जैसे ग्राहक को देखकर सभी एक दूसरे को ताक रही थी…उनके मॅनेजर ने जब जाकर उन्हे समझाया की वो किसके साथ आया है और उन्हे कितने सारे पैसे मिले है तो उनके सामने मना करने का सवाल ही नही था.
उनमे से दो सुंदर सी दिखने वाली लड़किया गंगू के पास आई और उसे अपने साथ लेकर एक कमरे मे चली गयी.
गंगू के पेट मे गुदगुदी सी हो रही थी, जो भी हो रहा था उसके लिए किसी सपने जैसा ही था..
अंदर पहुँचकर उन लड़कियो ने गंगू को कपड़े उतारने के लिए कहा, उसने कपड़े उतार कर अलमारी मे टाँग दिए..अब उसके शरीर पर सिर्फ़ एक पुराना सा कच्छा था ..जो कई जगह से फटा भी हुआ था..और लड़कियो को देखकर वैसे भी उसका लंड खड़ा हो चुका था पूरा का पूरा..
उसकी शक्ल तो वैसे भी भिखारियो जैसी थी..पर उसके गठीले शरीर और उसके उफनते लंड को देखकर वो दोनो लड़कियो के अंदर कुछ-2 होने लगा..
उनके नाम थे दिया और प्राची..
दिया तो शक्ल से ही बंगालन लग रही थी..उसकी बड़ी-2 आँखे और मोटे होंठ, हल्का सांवला रंग और मोटे-2 चुच्चे और उतनी ही मोटी गांड ..
प्राची शायद आसाम की होगी..उसका गोरा रंग और छोटे-2 मुम्मे बड़े ही गज़ब के लग रहे थे..
गंगू के शरीर पर काफ़ी मैल सी थी..इसलिए उन्होने पहले उसको नहलाने की सोची..उन दोनो लड़कियो ने भी अपने कपड़े उतार दिए और वो सिर्फ़ ब्रा-पेंटी मे खड़ी थी..उनके जिस्म को देखकर उसके लंड का साइज़ पूरे आकार मे आ गया…
वो दोनो गंगू को लेकर एक आलीशान से बाथरूम मे आ गयी और शावर चला दिया..
प्राची ने गंगू के शरीर पर साबुन लगाना शुरू किया और दिया ने अपने हाथ मे एक स्क्रबर लेकर उसके शरीर को रगड़ना शुरू कर दिया…गंगू तो अपने आप को आसमान पर उड़ता हुआ महसूस कर रहा था…उसने तो सोचा भी नही था की उसके जैसे भिखारी को ऐसे दिन भी देखने को मिलेंगे..
प्राची ने उसके सिर पर शेंपू लगाया, और पूरे शरीर को बॉडी वॉश से दोबारा से रगड़ा…
उसको नहलाते -2 वो दोनो भी पूरी तरह से भीग चुकी थी..पर ये तो उनका रोज का काम था..उसी काम के तो उन्हे पैसे मिलते थे..
अचानक प्राची ने गंगू के कच्छे को पकड़कर नीचे खींच दिया..गंगू ने अपने लंड को छुपाने की कोई कोशिश नही की पर उसे आश्चर्य ज़रूर हुआ की कितनी बेशर्मी से उसने वो कर दिया…शायद यही काम होगा इनका रोज का..
वो दोनों उसके लंड के साइज पलकें झपकना भूल गयी
उसे अच्छी तरह से नहलाने के बाद वो उसे बाहर ले आई…गंगू ने शीशे मे अपना पूरा अक्स देखा तो अपनी सफाई देखकर वो भी हैरान रह गया…पर चेहरे पर घनी दाढ़ी और लंड के चारों तरफ घना जंगल उसे अभी भी जंगली लुक दे रहा था..
दिया ने गंगू को एक बड़े से टेबल पर लिटाया और अगले ही पल दोनो ने अपने-2 बचे हुए कपड़े भी निकाल फेंके..
अपने सामने दोनो को एकदम से नंगा देखकर गंगू के सब्र का बाँध टूट गया और वो एकदम से उठा और प्राची के रसीले बदन से लिपट गया..
वो एकदम से चिल्लाई : “स्टॉप सर ….आप ये क्या कर रहे हैं…”
गंगू बेचारा एकदम से रुक गया…वो तो समझ रहा था की पहले उसको नंगा करके और फिर खुद नंगा होकर वो उसे चुदाई का निमंत्रण दे रही हैं..पर फिर उन्होने समझाया की वो दोनो मिलकर उसे स्पेशल मसाज देने वाली हैं..और उसके लिए वो बिना कपड़ो के ही अपने कस्टमर के सामने आती हैं..
वो समझ गया, उसे अपनी ग़लती का एहसास हुआ..वैसे तो वो इस तरह से मानने वालो मे से नही था, पर उँचे लोगो की उँची बातें , ये सोचकर वो कुछ ना बोला और चुपचाप टेबल पर लेट गया.
प्राची ने अपने हाथ मे एक तेल की बोतल ली, उसमे से अलग ही तरह की खुश्बू आ रही थी..और उसके गठीले शरीर पर मलने लगी..उसकी छातियो और कंधो को वो अपने नाज़ुक हाथों से सहलाने लगी..वो उसके सिर के उपर खड़ी हुई थी, जिसकी वजह से उसके लटके हुए मुम्मे उसके चेहरे पर टच कर रहे थे..वो आगे झुकती तो उसके दोनों मुम्मे उसके चेहरे पर दब जाते..पर गंगू अपनी तरफ से कोई भी पहल करके फिर से लज्जित नही होना चाहता था.
दिया ने उसके पैरों की मालिश करनी शुरू कर दी..और धीरे-2 उसकी जाँघो से होती हुई ,लंड को छोड़कर, पेट पर भी वही तेल मलने लगी..वो भी जब आगे झुकती तो उसके मुम्मे गंगू के पैरों के पंजों के उपर दब जाते..और धीरे-2 दिया ने अपनी लंबी उंगलियाँ उसके लंड के चारों तरफ भी घुमानी शुरू कर दी…उसकी बड़ी-२ गोटियों को जैसे ही दिया ने अपने हाथों मे पकड़ा ,गंगू के पंजों के उपर लटक रहे मुम्मों पर गंगू के पैरों की उंगलियों ने अपनी पकड़ बना ली और उसके निप्पल को गंगू ने अपने अंगूठे और साथ वाली उंगली के बीच फँसा कर ज़ोर से दबा दिया…
”आआययययययययययययययययीीईईईईईईईईईईईईईईई …. सस्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्सस्स ….”
दिया ने भी एक जोरदार सिसकारी मारते हुए उसके लंड को एकदम से पकड़ा और ज़ोर से दबा लिया…गंगू को एकबार तो ऐसा लगा की वो उसे उखाड़ कर अपने घर ही ले जाएगी..उसकी गांड अपनी जगह से उपर उठ गयी..और उसका लाभ उठाते हुए दिया ने अपने तेल से सने हाथ उसकी गांड के नीचे लगा कर वहाँ भी तेल मल दिया.
उपर की तरफ मालिश कर रही प्राची भी अब अपने असली रंग मे आने लगी थी..वो जान बूझकर अपने मोटे मुम्मे उसके होंठों के उपर लटका रही थी, जैसे कोई दासी अपने राजा को अंगूर खिलाती है, गंगू ने भी बड़े ही राजसी अंदाज मे अपना मुँह खोला और उसकी छाती पर लगे अंगूर को अपने मुँह के अंदर लेकर ज़ोर से चुभला दिया..
उसके मुँह से भी एक जोरदार सिसकारी निकल आई..
”आआआाागगगगगगगगगगगगघह …… उम्म्म्ममममममममम ”
अब गंगू का कब्जा दोनो के निप्पल्स पर था..नीचे उसने अपने दोनो पैरों की उंगलियों के बीच दिया के निप्पल फँसा रखे थे और उपर अपने मुँह के अंदर प्राची का और अपने हाथ से उसके दूसरे निप्पल को..
कुल मिलाकर माहौल अब काफ़ी गर्म हो चुका था..
गंगू ने फिर से पहल करने की सोची और दिया को अपने उपर खींचकर अपने लंड पर बिठाने की कोशिश करने लगा…
वो एक बार फिर से चीखी : “नही सर …आप ऐसा नही कर सकते…ये एलाउ नही है…”
गंगू को बहुत गुस्सा आया…साली ये कैसी लड़कियाँ है…उसके सामने पूरी नंगी खड़ी है, उसके शरीर से खेल रही है, अपने शरीर से खेलने दे रही है, पर चुदाई का टाइम आते ही कहती है की ये एलाउ नही है…
पर उसका तो ये पहला टाइम था, शायद इन लड़कियो की लिमिट यहीं तक ही है..
वो अपने मन पर काबू करते हुए फिर से लेट गया.
प्राची बोली : “सॉरी सर …पर फ़किंग एलाउ नही है…बाकी जो भी करना चाहे आप कर सकते हैं…”
भागते भूत की लंगोटी ही सही…ये सोचकर उसने चबर-2 बोल रही प्राची के मुँह के अंदर अपना लंड ठूस कर उसे चुप करा दिया…और दिया को अपने पास बुलाकर उसकी छोटी सी चूत के अंदर अपनी मोटी उंगली घुसेड दी..
दोनो सी-सी करती हुई मचलने लगी…
प्राची ने आजतक इतने बड़े लंड के दर्शन नही किए थे…उसे हेंडल करना उसके लिए काफ़ी मुश्किल हो रहा था..वो सही तरह से उसे अपने मुँह मे भी नही ले पा रही थी..
और दूसरी तरफ अपनी चूत के अंदर गंगू की उंगलियों की थिरकन से दिया किसी नर्तकी की तरह नाचने लगी…और गंगू के हल्के से झटके ने उसके चेहरे को उसके एकदम पास कर दिया…और अगले ही पल गंगू के खूंखार होंठों ने उस हिरनी के होंठों को अपने मुँह मे दबोचकर उसे चूसना शुरू कर दिया…

