तो दोस्तों चूत की एक और कहानी आपके लिए, कैसे हैं आप, मैं हूं रीना और मैं उत्तराखंड रुद्र पुर में अपने पति के साथ रहती हूं। मेरी उम्र वही बाइस साल है और मेरे पति करीब बत्तीस के हैं, हालांकि जवान हैं पर वही प्राइवेट कम्पनी में काम करने के बाद अक्सर आदमी थक के घर आता है और रात को बीबी की चूत की खुजली मिटाए बगैर ही सो जाता है।
इसलिए यही कहानी मेरे पति दया की भी थी। दया अक्सर देर को घर आता और सो जाता, कभी कभी शराब भी भांज लेता। एक रोज उसके बौस रजनीकांत मेरे घर उसके साथ आए। वो एक सजीला, गठीला और खूबसूरत मर्द था, दोनों ने बैठ कर साथ दारु पी। जब मैं स्नैक्स लेकर उन लोगों के पास गयी तो रजनीकांत मुझे एक टक घूर रहा था। मेरे पति को होश न था कि क्या चल रहा है, वो चार पैग लगा के आराम से ऊंघ रहा था,
रजनी की नजर मेरे वक्षस्थल पर थी। वो एक दम से मेरी बड़ी बड़ी चूंचियों को कामुक नजर से देख रहा था। इसलिए मेरे अन्दर एक अजीब सी हलचल मच गयी, शायद वो हैन्डसम था इसलिए। मेरा पल्लू गिर गया और मेरे बड़े बड़े उरोज उसके आंक्खों की चमक बढा गये
फिर जल्दी से मैने स्नैक्स टेबल पर रखा और वापस मुड़ी, जब मैं अपने किचेन की तरफ बढी तब भी पाया कि रजनी की नजरें मेरी बलखाती गांड और पतली कमर पर घूर रही थीं।
मैं समझ गयी उसकी नीयत खराब हो गयी थी, पर किया भी क्या जा सकता था। अब रजनी आए दिन मेरे घर आने जाने लगा, किसी न किसी बहाने से मुझसे बातें करने की सोचता पर मेरे पति के सख्त रवैये से मैं उससे बात न कर पाती। हालांकि चूत में खुजली तो मेरे भी हो ही रही थी, पर क्या करें, पति के रहते हुए यह सब संभव न था।
अचानक कंपनी में कर्मचारियों की छंटाई होने लगी। मेरे और मेरे पति की रोजी रोटी नौकरी ही थी, हम दोनों इस नौकरी के जाने के साथ ही बेवा हो जाते। मेरे पति कुछ खास पढे लिखे भी न थे कि तुरत दूसरी नौकरी मिल जाती।
और तभी रजनी ने इस हालात का फायदा उठाने की सोची। उस शनिवार वो हमारे घर आया। दोनों ने जम के दारु पी और फिर रजनी ने मेरे पति से अपने दिल की बात कह दी। जब दया पूरी तरह टल्ली हो गया तो वो बोला “ दया अगर तू चाहे तो तेरी नौकरी बच सकती है, और बल्कि तेरी बीबी की नौकरी भी कम्पनी में लग सकती है”
बेचारा मेरा पति भोला भाला, बोला ऐसा क्या? तो रजनी ने कहा हां यार, बिल्कुल, ऐसा ही है। कल कम्पनी का एनुअल फंक्शन है तुम अपनी बीबी रीना को लेकर जरुर आना, और उसने अपने पैकेट से एक इनविटेशन कार्ड निकाल कर दिया। और कहा कि अगर सब कुछ ठीक रहा तो मैं जरुर तुम्हारी नौकरी बचा लूंगा।
अगले दिन मैं दुल्हन की तरह सज संवर कर, लहंगा और चोली पहन कर अपने पति के साथ फंक्शन में शरीक होने चली गयी। वहां डांस और फिर स्नैक्स और फिर दारु का जो दौर चला उसमें मेरा शराबी पति बहक गया। रजनी उसे जानबूझ कर ज्यादा पिला रहा था। जब वो लुढक गया तो उसे गार्ड्स ने गेस्ट रुम में ले जाकर सुला दिया, शायद उसे एक बेहोशी का इन्जेक्शन भी लगवा दिया हो।
अब उस रात मैं दया की अमानत थी। दया मेरे पास आया और मुझे ड्रिंक आफर की। मैं पीती तो न थी, पर कल्चर फालो करने के लिए मुझे पीना पड़ा और मैने दो जाम लिये। अब बोला दया “ तो तुम्हें पता है न कि तुमको आज अपने पति की नौकरी बचानी है और अगर सब कुछ ठीक रहा तो हम तुम्हें भी नौकरी दिला देंगे”
इस बात पर मैं बोली हां, पर मुझे करना क्या होगा। उसने कहा अभी तुम्हें चेयर मैन के कमरे में ले जाउंगा, उनको खुश कर देना चाहे जैसे भी, फिर तुम्हारे पति की नौकरी पक्की।
इतना कहके वो मुझे आफिस के मेन केबिन में बने चेयर मैन के कमरे में ले गया। वहां तो तीन तीन मर्द बैठे थे। तो क्या मुझे तीनों को खुश करना था। मैने अंदर जाते ही सोचा, फिर कहा, चाहे एक बार मरो या बार बार मरो। और इसे एक अच्छा मौका समझ कर आज चुदने को तैयार हो गयी।
चेयर मैन ने मुझे अपने पास बुलाया और अपनी गोद में बिठा लि्या। उसके दो मुस्टंडे बाडी गार्ड आकर मेरी चोली उतारने लगे। धीरे से पीछे से डोरी खोली और मेरे चूंचे को नंगा कर दिया।
चेयर मैन ने हल्के हल्के चूंचे सहलाने शुरु किये और उन दोनों ने अपने लंड बाहर खींच लिये। मैने उन दोनों के लंड हाथ में पकड़ लिये। अब मैं सोफे पर पीठ के बल लेटी थी। मेरा लहंगा अब भी पहना हुआ था पर उपरी बदन नंगा था।
चेयर मैन मेरे पेट पर बैठ कर मेरे स्तनों को चूस रहा था और वो दोनों कमीने अब मुझसे देसी हस्तमैथुन का मजा ले रहे थे। मैने दोनों को एक दम जोर जोर से मूठ मारकर एकदम झड़ाने के करीब ला दिया तो उसमें से एक सोफे पर मेरे सिरहाने बैठ कर सिर के उल्टी तरफ से मेरे मुह में लंड डालने लगा और दूसरा मेरे पैरों के बीच आकर मेरी चूत को गजब चूसने लगा। वो चूत की फांके खोल खोल कर बारी बारी से चूस रहा था।
इस तरह मेरा बुड्ढा चेयर मैन मेरे चूंचे को पीने में ही उलझा रहा और दोनों बाडीगार्ड मुझे पेलने के करीब आ गये। पर यह उनकी मजबूरी थी। अब चेयर मैन ने उनको जाने को कहा। दोनों कमरा छोड़ कर बाहर चले गये।
आखिर में चेयर मैन ने मुझे पेट के बल लिटा दिया और मेरी गांड खोल कर चूसने लगा। साथ में चूत पर भी उंगली फेरने लगा। उसके गांड चूसने से मुझे अजीब सी मस्ती छा रही थी और पहले से मेरी चूत बाडीगार्ड्स ने चूस कर मस्त कर दी थी, सो अचानक से जब मुझे मजा आया तो फच्फचाते हुए चूत से माल की पिचकारी चेयरमैन के आंख और चेहरे पर पड़ती हुई मुख मे घुस गयी। वो खुश हो गया। उसने मुझे कहा, “ देखो रीना आज तुम ने मुझे खुश कर दिया, अब तुम्हारी नौकरी पक्की, और तुम्हारे पति की भी। आज से तुम मेरी निजी रखैल। तुमसा खूबसूरत बदन मैने आज तक न देखा। तुमने मुझे अपने चूत का अमृतपान कराया, आगे भी कराती रहना। और अगर वो रजनी कुत्ते का बच्चा, साला परेशान करे तो बताना उसे फायर कर दूंगी।
जब मैं बाहर निकली तो रजनी कुत्ते की तरह दुम दबाकर पूछने लगा “ क्या हुआ अंदर, जरा बताओगी, मुझे भी खुश कर दो” मैने डांटा – हट कमीने कुत्ते सूअर के बच्चे और वो डर गया, मैने अपना नया मोबाइल दिखाते हुए कहा, ये देख चेयरमैन ने मुझे दिया है, मेरी और मेरे पति की नौकरी पक्की और ज्यादा बोलेगा तो तुझे कर वा दूंगी फायर। वो दुम दबाके चला गया। उसकी चूत मारने की चाहत अधूरी रह गयी। सुबह पति जगे तो उनको कुछ पता न चला। आज हम दोनों नौकरी कर रहे हैं और चूत का पुजारी चेयर मैन मौके मौके से आकर मेरी चूत चूस लेता है। उसके बाडीगार्ड बदल दिए गये हैं, इसलिए मुझे कोई शरम नहीं, अपनी चूत की ताकत पर सर उठा कर चलती हूं।

